प्याज किसानों पर संकटमहाराष्ट्र में मराठवाड़ा के किसानों पर इस बार दोहरी मार पड़ी है. फसल के गिरते दाम और बेमौसम बारिश ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. एक ओर जहां प्याज के दाम लगातार गिरते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बेमौसम बारिश ने फसल की क्वालिटी और उत्पादन को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. इन हालातों ने किसानों की कमर तोड़ दी है और उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलना मुश्किल हो गया है.
लासुर स्टेशन क्षेत्र के एक किसान की कहानी इस संकट की सच्चाई को बयां करती है. किसान ने एक एकड़ में प्याज की खेती के लिए करीब 70 से 80 हजार रुपये खर्च किए. इस लागत में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी जैसे सभी जरूरी खर्च शामिल थे. लेकिन जब फसल तैयार होकर मंडी पहुंची, तो उन्हें उम्मीद के मुताबिक दाम नहीं मिले. बाजार में प्याज का भाव महज 100 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक सिमट गया, जो लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं है.
स्थिति इतनी खराब हो गई है कि किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने के लिए भी जेब से पैसा खर्च करना पड़ रहा है. ट्रांसपोर्ट का खर्च अलग से देना पड़ रहा है, जबकि फसल बेचने पर मिलने वाली रकम बेहद कम है. ऐसे में किसानों को सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनकी मेहनत का कोई मोल नहीं मिल रहा.
इस संकट को और गहरा करने का काम बेमौसम बारिश ने किया है. अचानक हुई बारिश से खेतों में खड़ी फसल और तैयार उपज दोनों प्रभावित हुई हैं. इससे प्याज की गुणवत्ता खराब हुई है, जिससे बाजार में उसकी कीमत और गिर गई. कई जगहों पर फसल सड़ने की स्थिति में पहुंच गई है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है. सबसे बड़ी समस्या कर्ज को लेकर सामने आ रही है. मराठवाड़ा के कई किसानों ने खेती के लिए साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लिया था. उन्हें उम्मीद थी कि अच्छी पैदावार और बेहतर दाम मिलने पर वे आसानी से कर्ज चुका देंगे, लेकिन मौजूदा हालात में जब फसल से कोई खास आमदनी नहीं हो रही है, तो कर्ज चुकाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है.
किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही सरकार की ओर से राहत नहीं मिली, तो हालात और बिगड़ सकते हैं. उचित समर्थन मूल्य, मुआवजा और अन्य राहत उपायों की सख्त जरूरत है, ताकि किसानों को इस आर्थिक संकट से बाहर निकाला जा सके. फिलहाल मराठवाड़ा का अन्नदाता गंभीर मुश्किलों से जूझ रहा है और उसे सहारे की जरूरत है. (इसरारुद्दीन चिश्ती की रिपोर्ट)
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