डीजल की किल्लत से किसान परेशानअंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की आंच अब झारखंड के रामगढ़ तक पहुंच गई है, जहां दिन-ब-दिन डीजल संकट गहराता जा रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि कई पेट्रोल पंपों पर बिना सूचना के ही “नो स्टॉक” के बोर्ड लग गए हैं, जबकि कुछ पंपों ने अचानक डीजल बिक्री बंद कर दी है. रामगढ़ में डीजल की कमी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती-किसानी भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रही है. ट्रक और ट्रैक्टर के पहिए थमने लगे हैं, जिससे परिवहन और कृषि कार्य दोनों पर संकट मंडरा रहा है.
बिहार से आए एक ट्रक ड्राइवर भोला प्रसाद यादव ने बताया कि यहां डीजल नहीं मिल रहा है, दूसरे पेट्रोल पंप पर लाइन लगाना पड़ रहा है. बहुत दिक्कत हो रहा है उधर लड़ाई चल रहा है और इधर तेल को लेकर दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, एक ट्रैक्टर चालक सुखदेव महतो ने बताया कि वो डीजल लेने आए हैं लेकिन यहां डीजल नहीं मिल रहा है, उन्होंने बताया कि वो खेती बाड़ी करने वाले किसान हैं, लेकिन डीजल नहीं मिलने से दिक्कत हो रहा है और खेती का काम प्रभावित हो रहा है, जिससे कई अन्य किसानों की भी चिंता बढ़ गई है.
पेट्रोल पंप संचालकों का भी यही हाल है. कुजू स्थित एक पेट्रोल पंप के मैनेजर के अनुसार, पेट्रोल तो किसी तरह दिया जा रहा है, लेकिन डीजल की सप्लाई पूरी तरह ठप है. जैन ब्रदर्स एचपी पेट्रोल पंप डीलर गौरव जैन ने बताया कि डीजल नहीं मिलने का सबसे बड़ा कारण युद्ध है. इससे प्रॉब्लम सभी को है क्षेत्र में जितने भी डीलर हैं सभी इससे जूझ रहे हैं. उनका कहना है कि पहले “डिलीवरी ऑन डिमांड” की सुविधा मिलती थी, लेकिन अब एडवांस भुगतान के बावजूद समय पर डीजल नहीं मिल पा रहा है. उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे यह संकट गहरा गया है.
इस पूरे मामले पर जिले के रामगढ़ डीसी ऋतुराज ने सख्ती दिखाई है. उन्होंने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए सप्लाई टीम को नोडल बनाया गया है और अधिकारियों को लगातार फील्ड विजिट के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही सभी एजेंसियों को स्टॉक और सप्लाई की निगरानी करने को कहा गया है, ताकि कहीं भी ब्लैक मार्केटिंग न हो सके. प्रशासन द्वारा सघन जांच अभियान भी चलाया जा रहा है और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नोडल एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है.
हालांकि, स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही डीजल संकट का समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर आम आदमी की रसोई और किसानों की खेती दोनों पर साफ नजर आएगा. बता दें कि मई का महीना आते हैं कई किसान अब खरीफ फसलों की खेती में जुट जाएंगे. ऐसे में इस समय डीजल की किल्लत किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बन सकती है.
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