45 डिग्री तापमान में भी ठंडक दे रहा ये पेड़, जानें इस प्राकृतिक AC की क्या है खासियत

45 डिग्री तापमान में भी ठंडक दे रहा ये पेड़, जानें इस प्राकृतिक AC की क्या है खासियत

राजस्थान में इन दिनों एक खास पेड़ को लेकर खूब चर्चा हो रही है, जिसे लोग “देसी AC” कह रहे हैं. भीषण गर्मी के बीच सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग इस पेड़ की घनी छांव में बैठकर राहत लेते नजर आ रहे हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में.

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45 डिग्री तापमान में भी ठंडक दे रहा ये पेड़, जानें इस प्राकृतिक AC की क्या है खासियतठंडक दे रहा ये पेड़

देश में इस समय भीषण गर्मी का कहर जारी है. कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने भी आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ने की चेतावनी दी है. ऐसे में जहां शहरों में लोग एसी का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया पर “देसी AC” की चर्चा तेजी से हो रही है. अब सवाल यह है कि आखिर यह देसी AC क्या है और कैसे काम करता है. आइए जानते हैं.

ये खास पेड़ बना देसी AC

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग एक खास पेड़ की छांव में बैठकर गर्मी से राहत लेते नजर आ रहे हैं. दरअसल, इस पेड़ को ‘मिठी जल’ या ‘पीलू’ कहा जाता है, जिसका वैज्ञानिक नाम Salvadora oleoides है. यह पेड़ राजस्थान के जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, चूरू, झुंझुनू और नागौर जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर पाया जाता है.

इस पेड़ के नीचे कम होता है तापमान

वायरल वीडियो के अनुसार, ‘मिठी जल’ पेड़ की घनी पत्तियों की वजह से इसके नीचे का तापमान आसपास के मुकाबले 5 से 8 डिग्री तक कम रहता है. तेज धूप में भी इस पेड़ के नीचे ठंडी हवा का एहसास होता है. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में किसान, आम लोग या लंबी यात्रा के दौरान राहगीर इसके नीचे बैठकर आराम करते हैं.

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इस पेड़ से क्यों कम होता है तापमान

'मिठी जल’ पेड़ की पत्तियां बहुत घनी होती हैं, जिससे सीधी धूप जमीन तक नहीं पहुंचती और नीचे का इलाका ठंडा बना रहता है. साथ ही, यह पेड़ ट्रांसपिरेशन की प्रक्रिया के जरिए पत्तियों से बहुत महीन जलवाष्प छोड़ता है, जो आसपास की हवा से गर्मी को कम कर देता है. इसके अलावा, पेड़ के नीचे से गुजरने वाली हवा पत्तियों से टकराकर धीमी और ठंडी हो जाती है. राजस्थान जैसे गर्म और सूखे इलाकों में यह असर और ज्यादा महसूस होता है. यही वजह है कि इसके नीचे तापमान 5–8 डिग्री तक कम महसूस होता है.

सिर्फ ठंडक ही नहीं, और भी हैं फायदे

मीठी जल’ का पेड़ सिर्फ ठंडक देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई और भी फायदे हैं. इसके मीठे बेर खाने योग्य होते हैं, जो स्वाद के साथ पोषण भी देते हैं. वहीं इसकी टहनियों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से दातुन के रूप में किया जाता है, जो दांतों के लिए फायदेमंद माना जाता है. इस पेड़ की खास बात यह है कि यह पेड़ सूखे और कम पानी वाले इलाकों में भी आसानी से उग जाता है. इसी वजह से इसे एक बेहद उपयोगी पेड़ माना जाता है, जो पर्यावरण और लोगों दोनों के लिए लाभकारी है.

लू में काम आ रहा ये देसी जुगाड़

भीषण गर्मी के बीच यह पेड़ ग्रामीण इलाकों में लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. जहां एक तरफ शहरों में बिजली और AC पर निर्भरता बढ़ रही है, वहीं यह प्राकृतिक उपाय बिना किसी खर्च के राहत दे रहा है. तेज गर्मी के इस दौर में ‘मिठी जल’ जैसे पेड़ यह साबित करते हैं कि प्रकृति के पास भी कई समाधान मौजूद हैं. जो लोगों को गर्मी से राहत पहुंचा सकते हैं. यही कारण है कि इसे राजस्थान का ‘देसी AC’ कहा जा रहा है. (AajTak.in)

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