पंजाब में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे किसान, दिल्ली में बढ़ सकता है प्रदूषण का स्तर

पंजाब में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे किसान, दिल्ली में बढ़ सकता है प्रदूषण का स्तर

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली के आस-पास के राज्‍यों और पंजाब में पराली जलाए जाने पर प्रतिबंध लगाया है. बावजूद इसके यह घटनाएं बंद नहीं हो रही है. इस बार किसानों ने अनुमा‍नित समय से पहले ही पराली जलाना शुरू कर दिया है. ऐसे में अगर ये घटनाएं जारी रहीं तो जल्‍द ही दिल्‍ली में प्रदूषण का स्‍तर बढ़ जाएगा. हालांकि पिछले साल पराली जलाने के मामलों में 25 प्रतिशत की कमी आई थी.

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पंजाब में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे किसान, दिल्ली में बढ़ सकता है प्रदूषण का स्तरपंजाब में किसानों ने पराली जलाना शुरू कर दिया है. (फाइल फोटो)

पंजाब की पराली की समस्‍या से राजधानी दिल्‍ली में जल्‍दी प्रदूषण दस्‍तक दे सकता है. दरअसल, यहां के किसानों ने अभी से ही पराली जलाना शुरू कर दिया है. पहले किसान 1 अक्‍टूबर के बाद पराली जलाया करते थे. हर साल ठंड के मौसम की शुरूआत और सीजन के दौरान में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में खेतों में किसानों द्वारा आग लगाने के कारण दिल्ली में प्रदूषण खतरनाक स्‍तर पर पहुंच जाता है, जिसके चलते लोगों को स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ता है. इन राज्‍यों के किसान फसल काटने के बाद सैकड़ों वर्ग किलोमीटर धान के खेतों में अवशेष नष्‍ट करने के लिए आग लगा देते हैं, जिससे खासकर दिल्ली में स्मॉग जैकेट बन जाती है.  

400 के पार पहुंच जाता है AQI

ठंड के सीजन में राजधानी की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच जाती है. यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 और कुछ समय 450 से भी ज्‍यादा ऊपर चला जाता है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताब‍िक, 15 सितंबर से अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और नवांशहर जिलों से पराली जलाने के 31 मामले सामने आए है. अकेले शुक्रवार को ही अमृतसर से 11 और नवांशहर और तरनतारन से एक-एक मामले यानी कुल 13 मामले सामने आए हैं. इनमें भी पराली जलाने के ज्‍यादातर मामले बासमती धान उगाने वाले किसानों के खेतों से हैं.

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पराली जलाने में टॉप पर अमृतसर

हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, अफसरों का कहना है कि पराली में लगाई जाने वाली आग को शून्‍य स्तर पर लाने की कोश‍िश की जा रही है. पंजाब में हर खरीफ सीजन में लगभग 70 लाख एकड़ रकबे में धान की खेती की जाती है. इस खेती से 22 मिलियन टन धान की पराली निकलती है. इस बार धान की कटाई शुरू होने से 15 दिन पहले ही पराली जलाने के मामले सामने आए हैं. शुक्रवार तक अमृतसर जिला 15 सितंबर से पीपीसीबी के रिकॉर्ड में 26 धान की पराली जलाने की घटनाओं के साथ चार्ट में सबसे ऊपर है. इसके बाद तरण तारण (3) और फिरोजपुर और नवांशहर में एक-एक मामला दर्ज किया गया है. 

पिछले साल 25 प्रतिशत मामले घटे थे

पीपीसीबी के अध्यक्ष आदर्श पाल विज ने कहा, "हम खेतों में आग लगाने की घटनाओं को शून्य स्तर पर लाने की दिशा में काम कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) हर दिन निगरानी कर रहे हैं." वहीं, पीपीसीबी और पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (पीआरएससी) के अनुसार, 2023 में पंजाब में खेतों में आग लगने की घटनाओं में 25% की कमी देखी गई थी. 2022 में 49,922 पराली जलाने की घटनाए दर्ज की गई थीं जो 2023 में 36,623 थी.

अफसरों को कार्रवाई के निर्देश

इधर, कृषि विभाग के प्रभारी विशेष मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के निर्देश बहुत साफ हैं कि धान की पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए. मैंने सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को इसके अनुसार कार्रवाई करने के लिए कहा है." 

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