Workers packing wheat the Anaj Mandi or wheat market in Ballabgarh, Haryana- photo by Vikram Sharmaईरान युद्ध का असर अब मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन पर पड़ता दिख रहा है. सरकार ने एक बार फिर से गेहूं उपार्जन की तारीख बढ़ा दी है. दरअसल गेहूं खरीदने कर उसके भंडारण के लिए जो पीपी बैग चाहिए, सरकार उसकी कमी से जूझ रही है और इसकी वजह है ईरान युद्ध. जानिए कैसे ईरान युद्ध हजारों किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बना है परेशानी की वजह.
सीहोर जिले को दुनिया भर में उसके शरबती गेहूं के लिए जाना जाता है. लेकिन सीहोर के किसान इन दिनों गेहूं के बड़े-बड़े ढेर की वजह से परेशान हैं क्योंकि सरकार बार-बार समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी की तारीख को आगे बढ़ा रही है. पहले सरकार ने गेहूं खरीदी की तारीख 16 मार्च तय की थी जिसे बाद में 1 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया था. लेकिन अब इसे फिर से आगे बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दिया गया है.
अब वो किसान जिन्होंने 16 मार्च समर्थन मूल्य की खरीदी तारीख को देखते हुए अपना गेहूं मंडी में लेकर पहुंचे थे, वे अब परेशान हो रहे हैं. सीहोर जिले के रफीकगंज के किसान अवध नारायण ने बताया कि वे 20 एकड़ में गेहूं की खेती करते हैं. समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की तारीख बढ़ाने से परेशानी बढ़ गई है. बीते वर्ष में तो गेहूं खरीदी अब तक हो चुकी थी, पेमेंट भी हो जाता था, लेकिन अब तक गेहूं खरीदी नहीं हुई है. प्याज भी कटी पड़ी है. ऐसे में प्याज और गेहूं को कहां स्टोर किया जाए, बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
वहीं मौसम में भी परिवर्तन हो रहा है जिसको लेकर परेशानी है. किसान नरेश परमार ने बताया कि वह 15 एकड़ में गेहूं की खेती करते हैं. गेहूं को कटे हुए करीब एक महीना हो चुका है, लेकिन अब तक समर्थन मूल्य की तारीख नहीं आई और गेहूं यहीं पर ही पड़ा है. मौसम में भी परिवर्तन हो रहा है जिसको लेकर चिंता है. अब तारीख बढ़ने से एक साथ किसान केंद्रों पर टूटेंगे जिससे उन्हें परेशानी होगी. जल्दी खरीदी होती तो भुगतान भी समय पर हो जाता. गेहूं खरीदी नहीं होने से उन्हें गेहूं की निगरानी करनी पड़ रही है.
किसान तो गेहूं की फसल ना बिकने से परेशान हैं, लेकिन सरकार भी परेशान है. इस परेशानी की वजह है उस बारदाने की कमी जिसमें गेहूं का भंडारण होना है. दरअसल, ईरान युद्ध के चलते पॉलीप्रोपाइलीन और हाई डेंसिटी पॉलीप्रोपाइलीन (HDPP) बैग का उत्पादन प्रभावित हुआ है. गेहूं उपार्जन के लिए नागरिक आपूर्ति निगम को 15.60 करोड़ बारदानों की जरूरत है, जबकि सरकार के पास वर्तमान में सिर्फ 5.50 करोड़ बारदाने मौजूद हैं.
सरकार ने बारदाने की कमी को लेकर मंगलवार को बैठक भी बुलाई जिसमें वेयरहाउस मालिकों को बताया गया कि फिलहाल बारदानों की कमी है. वेयरहाउस मालिक चैतन्य दुबे ने कहा कि उपार्जन को लेकर बैठक बुलाई गई थी जिसमें बताया गया है कि 10 तारीख से गेहूं उपार्जन होगा. लेट इसलिए हो रहा है क्योंकि अफसरों का कहना है कि बारदाने की कमी है. हर बार जनवरी-फरवरी तक बारदाना नहीं मिला. जूट और पीपी दो तरह के बारदान होते हैं.
सरकार के जुड़े सूत्रों के मुताबिक बारदाने की खरीदी के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं. लेकिन कांग्रेस इस देरी पर अब सवाल खड़े कर रही है और सरकार पर लापरवाही के आरोप लगा रही है.
मध्यप्रदेश में इस साल लगभग 19.04 लाख किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है और सरकार का खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से अधिक रखा गया है. राज्य सरकार 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस पर गेहूं खरीदी करने वाली है. इसे देखते हुए माना जा रहा है कि बड़े पैमाने पर किसान गेहूं बेचने तो आएंगे लेकिन ईरान युद्ध के चलते प्रभावित हुई बारदाने की सप्लाई ने सवाल खड़े कर दिए हैं.
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