ओलावृष्टि से नुकसान की जानकारी देते हुए स्थानीय लोगजम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में शुक्रवार शाम हुई तेज बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जिले के चक मंत्रीगाम, पजलपोरा, क्रालपोरा और बनकूट समेत कई गांव इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम करीब 6 बजे से 7 बजे के बीच अचानक मौसम बदला और तेज बारिश शुरू हो गई. भारी ओलों और बारिश की वजह से बागानों, सब्जियों और खेतों में खड़ी फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचा है. कई इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन गई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ.
स्थानीय किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि की मार सबसे ज्यादा खेती और बागवानी पर पड़ी है. किसानों के अनुसार मक्का की फसल, मौसमी सब्जियां और धान की नर्सरी बुरी तरह प्रभावित हुई है. चक मंत्रीगाम गांव के निवासी लतीफ ने बताया कि इलाके में इतनी तेज ओलावृष्टि हुई कि खेतों में लगी लगभग हर फसल को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि धान की नर्सरी का खराब होना किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता है, क्योंकि दोबारा इसकी तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा है. किसानों का कहना है कि आने वाले दिनों में इसका असर खेती की पूरी प्रक्रिया पर पड़ सकता है.
स्थानीय निवासी नजीर अहमद खान ने बताया कि उन्होंने अपने करीब 60 साल के जीवन में इस इलाके में इतनी भीषण ओलावृष्टि पहले कभी नहीं देखी. उनके अनुसार बोनकूट ब्लॉक के कई गांवों में लगभग 100 फीसदी तक नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि मक्की, सब्जियां और बागात पूरी तरह प्रभावित हुए हैं. कई बाग मालिकों ने अपने सेब और अन्य फलों के बागों की देखभाल में 70 से 80 हजार रुपये तक खर्च किए थे, लेकिन अचानक आई इस आपदा ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया.
ग्रामीणों के मुताबिक, तेज ओलों की वजह से कई मकानों की पुरानी टीन की छतों में सुराख हो गए. लोगों का कहना है कि खेती और बागवानी ही उनकी आय का मुख्य साधन है, लेकिन फसलों के नुकसान के बाद अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. कई किसानों ने खेती और बागवानी के लिए KCC लोन भी लिया हुआ है, जिससे अब कर्ज चुकाने की चिंता और बढ़ गई है.
प्रभावित गांवों के लोगों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराने और नुकसान का आकलन करने की मांग की है. किसानों ने डीसी, एलजी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अपील की है कि प्रभावित परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता और मुआवजा दिया जाए, ताकि किसान दोबारा खेती की तैयारी कर सकें और उनकी रोजी-रोटी पर आया संकट कुछ कम हो सके.
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