फल्गु नदी पर बना केनी पुल जर्जरबिहार के गया जिले में फल्गु नदी पर बना केनी पुल इन दिनों गंभीर जर्जर स्थिति में पहुंच गया है. बेलागंज और अतरी विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह पुल अब लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा खतरे का कारण बनता जा रहा है. पुल के कुल 22 पिलरों में से पांच पिलर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका जताई जा रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार कई पिलरों की सीमेंट की परत टूट चुकी है और उनमें लगी लोहे की सरिया (छड़) बाहर दिखाई देने लगी है. कुछ जगहों पर सरिया सीमेंट से अलग होकर लटक रही है, जबकि कई पिलरों में लोहे के ढांचे पूरी तरह खुल चुके हैं. पुल की यह स्थिति लोगों में डर पैदा कर रही है, क्योंकि प्रतिदिन हजारों लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं.
यह केनी पुल वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के कार्यकाल में लगभग 68 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ था. लेकिन निर्माण के दस वर्ष पूरे होने से पहले ही पुल की हालत खराब हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पुल को दशकों तक लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया था, वही अब जान का खतरा बन गया है.
सबसे बड़ी चिंता यह है कि मॉनसून का मौसम नजदीक है. यदि इस वर्ष फल्गु नदी में बाढ़ आती है तो पहले से कमजोर हो चुके पिलरों को और नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में पुल के किसी हिस्से के टूटने या बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. जानकारी के मुताबिक, पुल की स्थिति को लेकर विशेषज्ञों द्वारा भी जांच की जा चुकी है. पटना IIT की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जा चुकी है, जिसमें पुल के कई पिलरों को क्षतिग्रस्त बताया गया था. इसके बावजूद अब तक मरम्मत या सुदृढ़ीकरण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है.
गांव के सामाजिक कार्यकर्ता नीतीश कुमार चंदन का कहना है कि पुल के जर्जर होने का मुख्य कारण फल्गु नदी में नियमों के विपरीत बड़े पैमाने पर बालू खनन है. उनका आरोप है कि बालू घाटों के ठेकेदारों ने निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया, जिससे नदी के तल में बदलाव आया और पुल की नींव कमजोर होती चली गई. उन्होंने कहा कि हाल ही में बिहार के पुलों और पुलियों के निरीक्षण के दौरान भी केनी पुल के पांच से छह पिलरों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पाया गया था.
स्थानीय ग्रामीण चंदन कुमार, शिवेंद्र कुमार और संजीव कुमार का कहना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत नहीं कराई गई तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है. पुल के टूटने की स्थिति में बेलागंज और अतरी विधानसभा के हजारों ग्रामीणों का संपर्क प्रभावित होगा और उन्हें आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि केनी पुल की तत्काल तकनीकी जांच कराकर उसकी मरम्मत और मजबूती के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि किसी संभावित हादसे को टाला जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. (पंकज कुमार की रिपोर्ट)
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