मक्का भाव में और गिरावट (सांकेतिक तस्वीर)देशभर में मक्का उत्पादक किसानों के लिए मौजूदा मार्केटिंग सीजन चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. बीते खरीफ में बड़ी संख्या में किसानों ने सोयाबीन और कपास जैसी फसलों से दूरी बनाकर मक्का की खेती की थी, इस उम्मीद में कि उन्हें 2400 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी का लाभ मिलेगा और पिछले नुकसान की भरपाई हो सकेगी. लेकिन जमीनी हालात ने किसानों की यह उम्मीद तोड़ दी है. वहीं, रबी सीजन में भी मक्का की बुवाई में हल्की बढ़ोतरी दिखाई दी, लेकिन सही दाम न मिलने से किसान निराश हैं.
इस बीच, सरकारी पोर्टल एगमार्कनेट पर मक्का के अप्रैल 2026 के मंडी भाव के रुझान के आंकड़े सामने आ गए हैं. मासिक प्राइस ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक, मक्का का औसत थोक भाव करीब 1797 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है, जो MSP से 603 रुपये कम है. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में औसत कीमतें 1600 से 1650 रुपये के आसपास बनी हुई हैं, जिससे किसानों को महीनों की मेहनत के बाद नुकसान उठाना पड़ रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं थी, जहां औसत कीमत करीब 1892 रुपये प्रति क्विंटल रही. यानी एक महीने में कीमतों में और गिरावट दर्ज हुई. अप्रैल में यह गिरावट और तेज हो गई, जिससे साफ है कि मंडियों में दबाव लगातार बना हुआ है.
अगर पिछले कुछ महीनों का ट्रेंड देखें तो नवंबर 2025 में औसत कीमत करीब 2150 रुपये थी, जो दिसंबर में 2175 रुपये तक पहुंची, लेकिन इसके बाद जनवरी में गिरकर 1999 रुपये और फरवरी में 1990 रुपये रह गई. मार्च और अप्रैल में यह गिरावट और गहरी हो गई. इस पूरे दौर में एक भी महीना ऐसा नहीं रहा जब बाजार भाव MSP 2400 रुपये के करीब पहुंचा हो. इसका मतलब यह है कि किसानों को घोषित समर्थन मूल्य का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है.
सीएसीपी के अनुसार, मक्का की लागत करीब 1508 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है और MSP तय करते समय करीब 59 प्रतिशत मार्जिन देने का दावा किया गया है. लेकिन अब बाजार में कीमतें 1700-1800 रुपये के आसपास हैं और किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है.
बता दें कि बीते खरीफ सीजन में फसल बदलने का फैसला भी किसानों के लिए राहत नहीं ला सका. किसानों ने सोयाबीन और कपास में नुकसान से बचने के लिए मक्का को चुना था, लेकिन यह फसल भी उम्मीद के मुताबिक सहारा नहीं दे सकी. MSP और बाजार भाव के बीच बढ़ता अंतर किसानों की आय के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.
इस बीच, इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के असर के चलते कपास और सोयाबीन के भाव में तेजी देखी गई है और कीमतें एमएसपी के पार पहुंची है. जिससे इन दो फसलों को चुनने वाले किसानों को थोड़ी राहत मिली है. लेकिन वहीं दूसरी ओर मक्का किसानों ने बीते कई महीनों से एमएसपी की सूरत भी नहीं देखी है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today