रूस-यूक्रेन लड़ाई से भारत में क्यों बढ़ गया सोया तेल का आयात? समझिए पूरा मामला

रूस-यूक्रेन लड़ाई से भारत में क्यों बढ़ गया सोया तेल का आयात? समझिए पूरा मामला

रूस-यूक्रेन लड़ाई के कारण काला सागर क्षेत्र से सूरजमुखी तेल की आपूर्ति प्रभावित हो गई है. इसके चलते भारत ने विकल्प के तौर पर सोया तेल का आयात बढ़ा दिया है. अगस्त में सोया तेल का आयात 6 लाख टन से अधिक पहुंचने की संभावना है, जो सामान्य स्तर से काफी ज्यादा है. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति संकट, महंगा क्रूड ऑयल और जैव ईंधन की बढ़ती मांग के कारण त्योहारी सीजन में खाद्य तेलों के दाम बढ़ सकते हैं.

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रूस-यूक्रेन लड़ाई से भारत में क्यों बढ़ गया सोया तेल का आयात? समझिए पूरा मामलाभारत में सूरजमुखी तेल की सप्लाई पर असर

रूस और यूक्रेन के बीच काला सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है. सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में आई बाधा के कारण देश में सोया तेल का आयात तेजी से बढ़ रहा है. खाद्य तेल कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को खाद्य तेलों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है.

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया कि पिछले एक महीने से अधिक समय से रूस और यूक्रेन के बीच काला सागर क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण सूरजमुखी तेल का आयात प्रभावित हुआ है. यही वजह है कि भारतीय आयातकों ने विकल्प के तौर पर सोया तेल की खरीद बढ़ा दी है.

उन्होंने कहा कि अगस्त महीने में भारत का सोया तेल आयात 6 लाख मीट्रिक टन से अधिक पहुंचने की संभावना है. यह मौजूदा मार्केटिंग वर्ष के औसत मासिक आयात 4.24 लाख टन की तुलना में करीब 46 प्रतिशत अधिक होगा. यदि ऐसा होता है तो यह इस साल के सबसे बड़े आयात स्तरों में शामिल होगा.

खाने के तेल पर लड़ाई का असर

दरअसल, हाल के महीनों में रूस और यूक्रेन ने काला सागर क्षेत्र के बंदरगाहों और समुद्री ढांचे को निशाना बनाया है. इसके कारण अनाज और खाने के तेलों के निर्यात पर असर पड़ा है. समुद्री मार्ग से होने वाली सप्लाई रुकने के चलते वैश्विक बाजार में सूरजमुखी तेल की उपलब्धता घट रही है.

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा रूस और यूक्रेन से आयात करता है. ऐसे में वहां से आपूर्ति प्रभावित होने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है. जानकारों के मुताबिक अगस्त में सूरजमुखी तेल का आयात फरवरी 2026 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकता है.

व्यापारिक सूत्रों के अनुसार काला सागर क्षेत्र से आने वाली करीब 1.40 लाख टन सूरजमुखी तेल की खेपें, जो अगस्त और सितंबर में भारत पहुंचने वाली थीं, संघर्ष के कारण देरी का शिकार हो गई हैं. इससे बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है.

सूरजमुखी तेल की मांग और दाम दोनों अधिक

आमतौर पर दक्षिण भारत में सूरजमुखी तेल की मांग अधिक रहती है क्योंकि समुद्री मालभाड़ा कम होने के कारण यह कई बार सोया तेल से सस्ता पड़ता है. लेकिन इस बार आपूर्ति रुकने के कारण दक्षिणी राज्यों के आयातकों ने भी सोया तेल की खरीद बढ़ा दी है.

भारत सामान्य तौर पर अर्जेंटीना और ब्राजील से सोया तेल आयात करता है. हालांकि इस बार तत्काल जरूरत को पूरा करने के लिए चीन, मिस्र, थाइलैंड और तुर्की जैसे देशों से भी सोया तेल खरीदा जा रहा है. इससे साफ है कि आयातक किसी भी तरह बाजार में आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.

शंकर ठक्कर के अनुसार खाद्य तेल बाजार पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. अल नीनो के प्रभाव से उत्पादन घटने की आशंकाओं ने पहले ही बाजार में तेजी पैदा कर दी थी. इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती देखने को मिली है. वहीं इंडोनेशिया में बायोडीजल में पाम ऑयल के उपयोग को बढ़ाने के फैसले से वैश्विक पाम तेल बाजार भी प्रभावित हुआ है.

ऐसे में सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में आई नई बाधा खाद्य तेल बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्दी सामान्य नहीं हुई तो आने वाले त्योहारी सीजन में खाद्य तेलों की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा.

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