अल नीनो का दिख रहा असर (AI Image)आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि गंभीर अल नीनो परिस्थितियों के कारण राज्य में बारिश की कमी बनी हुई है. उन्होंने विधानसभा में कहा कि इसका असर खेती और जल उपलब्धता पर भी दिखाई दे रहा है. जून से दिसंबर के बीच राज्य में 557 मिमी बारिश होने का अनुमान है, जबकि सामान्य औसत 867 मिमी है. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों में 2026 में सामान्य से कम बारिश दर्ज होने की आशंका है. मुख्यमंत्री ने बताया कि जुलाई में कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी 68 फीसदी तक रही है. अगस्त में 35 फीसदी और सितंबर में भी इसी तरह की कमी का अनुमान है. अक्टूबर में 25 फीसदी और नवंबर में 20 फीसदी कम बारिश की आशंका है. दिसंबर में सामान्य से एक फीसदी ज्यादा बारिश होने का अनुमान है.
सीएम नायडू ने कहा कि लंबे समय से जारी सूखे के कारण विभिन्न नदी बेसिन, सिंचाई प्रोजेक्ट्स और जलाशयों में पानी का स्तर घट रहा है. उन्होंने कहा कि अल नीनो का असर खेती पर साफ तरह से दिखाई दे रहा है और भूजल स्तर भी कम हो रहा है. मुख्यमंत्री ने किसानों से पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए फसल की बुवाई करने को कहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि गोदावरी डेल्टा के बाहर बुवाई करने पर फसल खराब हो सकती है. उन्होंने पानी के कुशल इस्तेमाल के लिए बनाई गई प्रवर्तन समितियों के जरिए स्थिति को संभालने की बात कही.
सीएम ने कहा कि श्रीशैलम में 753 टीएमसी पानी आने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक सिर्फ 214 टीएमसी पानी ही पहुंचा है. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश को कर्नाटक और महाराष्ट्र से पानी मिलता है और वहां के जलाशय भरने के बाद ही राज्य में पानी का फ्लो बढ़ता है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कम पानी आने से श्रीशैलम और नागार्जुन सागर परियोजनाओं में पानी का फ्लो प्रभावित हुआ है. कृष्णा और पेन्ना नदी बेसिन में स्थिति दबाव वाली है, जबकि गोदावरी बेसिन में पानी की उपलब्धता तुलनात्मक रूप से बेहतर है.
नायडू ने कहा कि गोदावरी बेसिन में उपलब्ध पानी के कारण पट्टीसीमा परियोजना के जरिए कृष्णा डेल्टा तक पानी पहुंचाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि राज्य ने पिछले दो वर्षों में बेहतर जल प्रबंधन के जरिए 552 टीएमसी तक पानी बचाया है. डोवलेश्वरम स्थित सर आर्थर कॉटन बैराज में फिलहाल 2,557 टीएमसी की क्षमता के मुकाबले 1,071 टीएमसी पानी है.
नायडू ने कहा कि राज्य के मुख्य जलाशयों में कुल 586 टीएमसी पानी उपलब्ध है और भूजल स्तर भी घट रहा है. सरकार ने संभावित पेयजल संकट से निपटने और उद्योगों की जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए कार्ययोजना तैयार की है. उन्होंने जनप्रतिनिधियों से मौजूदा स्थिति को समझने और लोगों को इसके लिए तैयार करने की अपील की.
नायडू ने कहा कि भविष्य में अल नीनो की परिस्थितियों से निपटने के लिए राज्य ने तीन साल की आकस्मिक योजना तैयार की है. इसके तहत 35,555 करोड़ रुपये की लागत से 36 परियोजनाओं के लिए सिंचाई कैलेंडर जारी किया गया है. इन परियोजनाओं से 19.1 लाख एकड़ नई अयाकट भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है. पोलावरम परियोजना के जरिए गोदावरी का पानी अनकापल्ली तक पहुंचाया जाएगा. उन्होंने विशाखापट्टनम की औद्योगिक जरूरतों और डेटा सेंटरों के लिए भी पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया.
विधानसभा में नायडू ने मेगा डीएससी-2025 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का भी बचाव किया. उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी रही और प्रत्येक उम्मीदवार का चयन ट्रेस करने योग्य तथा जवाबदेह है. सीएम नायडू ने कहा कि मेगा डीएससी परीक्षा में 3.3 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और इसमें सरकारी शिक्षक के 15,941 पदों की भर्ती की गई. उन्होंने बताया कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया 148 दिनों में पूरी हुई और 13 विषयों से 42,000 सवाल तैयार किए गए.
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार एक भी शिक्षक पद भरने में विफल रही. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान 10 लाख से 12 लाख छात्रों ने सरकारी स्कूल छोड़ दिए, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में एक लाख छात्र निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आए हैं. नायडू ने कहा कि मेगा डीएससी के जरिए शिक्षक भर्ती सरकार के प्रमुख चुनावी वादों में से एक को पूरा करती है. उन्होंने यह भी कहा कि डीएससी-2025 में केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार खेल कोटा लागू किया गया. (पीटीआई)
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