केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहाननई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट संकेत दिए कि कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और लक्षित लाभ सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल फार्मर आईडी को तेजी से लागू करना अब प्राथमिकता है. उन्होंने राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले समय में किसान से जुड़ी सभी योजनाएं इसी एकीकृत पहचान प्रणाली पर आधारित होंगी, जिससे लाभ सीधे वास्तविक पात्र किसानों तक पहुंचेगा.
बैठक में मंत्री ने जोर देकर कहा कि फार्मर आईडी को देश की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़कर किसान की पूरी प्रोफाइल एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएगी. इसमें जमीन, फसल, परिवार और अन्य कृषि संबंधी जानकारी शामिल होगी. इससे पीएम-किसान, एमएसपी खरीद, फसल बीमा और उर्वरक सब्सिडी जैसी योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और भुगतान सीधे खातों में जाएगा.
केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया कि किसी भी किसान की जमीन का एक भी हिस्सा इस व्यवस्था से बाहर न रहे. खसरा-खतौनी से लेकर छोटे-छोटे प्लॉट तक का पूरा विवरण दर्ज किया जाए. साथ ही बंटाईदार, पट्टेदार और टेनेंट किसानों को भी इस प्रणाली में शामिल करने पर जोर दिया गया, ताकि वास्तविक खेती करने वाले किसान किसी भी योजना के लाभ से वंचित न रहें.
फार्मर आईडी के जरिए किसानों को कृषि ऋण और केसीसी जैसी सुविधाएं तेजी से उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई. मंत्री ने कहा कि इस डिजिटल व्यवस्था से किसानों को बार-बार दस्तावेज जमा करने या दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. एमएसपी पर खरीद और सब्सिडी वितरण में भी पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता मिल सकेगी.
बैठक में कई राज्यों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ राज्यों ने लक्ष्य से बेहतर प्रगति दिखाई है, जो अन्य राज्यों के लिए उदाहरण है. वहीं जिन राज्यों की गति धीमी है, उनसे व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा कर तेजी लाने को कहा गया. उन्होंने छह महीने के भीतर 100 प्रतिशत किसानों और भूमि कवरेज का लक्ष्य हासिल करने के लिए मिशन मोड में काम करने का आह्वान किया.
फर्टिलाइज़र के मुद्दे पर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई. मंत्री ने कहा कि देश में पर्याप्त खाद उपलब्ध है, लेकिन उसका न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करना उतना ही जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि फार्मर आईडी से जुड़ी प्रणाली के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि किस किसान को कितनी खाद की जरूरत है, जिससे अनावश्यक उठाव और दुरुपयोग पर रोक लगेगी.
केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया कि उर्वरक की कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की जाए. अगर किसी क्षेत्र में असामान्य रूप से अधिक खपत नजर आती है तो तुरंत जांच और छापेमारी की जाए. मंत्री ने कहा कि कृत्रिम कमी पैदा करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके और बाजार में संतुलन बना रहे.
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि उर्वरक वितरण प्रणाली में केवल जमीन मालिक ही नहीं, बल्कि वास्तविक खेती करने वाले किसानों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए. बंटाईदार और लीज पर खेती करने वाले किसानों को प्रमाणित कर उन्हें भी उचित मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया.
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से कहा कि फार्मर आईडी और संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक करना बेहद जरूरी है. इसके लिए गांव स्तर पर शिविर, अभियान और कृषि विस्तार तंत्र को सक्रिय किया जाएगा. आईसीएआर, केवीके और अन्य संस्थाओं के सहयोग से किसानों को नई व्यवस्था और वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी जाएगी.
बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि तकनीक के जरिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय मजबूत कर हर किसान तक समय पर लाभ पहुंचाया जाएगा. अगर इस पहल को मिशन मोड में लागू किया गया तो देश का हर किसान डिजिटल रूप से जुड़कर योजनाओं का पूरा लाभ ले सकेगा और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ेंगी.
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