CAQM के पराली जलाने पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश (फाइल फोटो)दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के खतरे के बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management- CAQM) ने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया है. शुक्रवार को आयोग की 28वीं पूर्ण बैठक में अप्रैल से मई के बीच अचानक बढ़े मामलों की समीक्षा की गई और राज्यों को निगरानी और कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए. बैठक में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल से 15 मई के बीच पंजाब में पराली जलाने के 8,986 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 6,474 थी. वहीं हरियाणा में भी हालात चिंताजनक रहे, जहां इस बार 3,290 घटनाएं दर्ज हुईं. जबकि, पिछले वर्ष इसी अवधि में 1,503 मामले सामने आए थे. आयोग ने माना कि शुरुआती महीनों में ही इतनी बड़ी संख्या भविष्य में प्रदूषण के गंभीर खतरे का संकेत दे रही है.
बैठक में केवल पराली जलाने के मुद्दे के अलावा दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए चल रहे दूसरे कदमों की भी समीक्षा की गई. आयोग ने निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र(CAAQMS) नेटवर्क को मजबूत करने की प्रगति पर चर्चा की. इसके तहत पूरे NCR क्षेत्र में 46 नए मॉनिटरिंग स्टेशन लगाने की योजना पर जोर दिया गया.
नई योजना के तहत दिल्ली में 14, हरियाणा में 16, उत्तर प्रदेश में 15 और राजस्थान में 1 अतिरिक्त मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए जाएंगे. इसके बाद पूरे दिल्ली-NCR में ऐसे स्टेशनों की कुल संख्या बढ़कर 157 हो जाएगी. आयोग ने संबंधित राज्यों को निर्देश दिया कि इन स्टेशनों की स्थापना में देरी न हो और तय समय में काम पूरा किया जाए.
बैठक में 2026-27 के लिए तय किए गए वृक्षारोपण और हरित क्षेत्र विस्तार कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई. आयोग ने कहा कि NCR क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र में करीब 4.60 करोड़ पेड़, झाड़ियां और बांस लगाने का लक्ष्य तय किया गया है. आयोग ने राज्यों से नियमित निगरानी और जमीनी अमल सुनिश्चित करने को कहा.
CAQM ने साफ किया कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए जारी निर्देशों का सख्ती से पालन जरूरी है. आयोग ने राज्यों और संबंधित एजेंसियों से कहा कि वार्षिक एक्शन प्लान और सेक्टर आधारित योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए, ताकि आने वाले महीनों में प्रदूषण की स्थिति को काबू में रखा जा सके. (पीटीआई)
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