बासमती चावल (सांकेतिक तस्वीर)देश के बासमती चावल निर्यात कारोबार से जुड़ा संगठन इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) अब बासमती फसल सर्वे में सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहता है. संगठन ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA को पत्र लिखकर कहा है कि बासमती उत्पादन का सही आकलन, निर्यात रणनीति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती की साख बनाए रखने के लिए यह सर्वे बेहद जरूरी है. संगठन ने इसे सरकार और उद्योग के बीच एक मजबूत साझेदारी का मॉडल बताया है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, IREF के महानिदेशक विनोद कुमार कौल ने APEDA चेयरमैन अभिषेक देव को भेजे पत्र में कहा कि पहले APEDA की बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन यानी BEDF हर साल बासमती फसल सर्वे कराती थी. इसमें सैटेलाइट इमेजरी, फील्ड सर्वे, फसल की स्थिति और उत्पादन अनुमान जैसे कई पहलुओं का आकलन किया जाता था. लेकिन वर्ष 2023 के बाद से इस तरह का सर्वे नहीं हुआ है. संगठन ने कहा कि निर्यातकों के लिए कारोबारी फैसले लेने में यह सर्वे अहम भूमिका निभाता है, इसलिए इसे दोबारा शुरू किया जाना चाहिए.
दरअसल, हाल ही में APEDA की AI आधारित बासमती धान सर्वे योजना को लेकर भी चर्चा तेज हुई थी. यह सर्वे करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में करने की तैयारी है, जबकि APEDA की ही 2023 रिपोर्ट में बासमती क्षेत्र करीब 21.4 लाख हेक्टेयर बताया गया था. इसी वजह से यह सवाल उठने लगे कि क्या बासमती GI क्षेत्र को बढ़ाने की तैयारी चल रही है. खासतौर पर मध्य प्रदेश को GI क्षेत्र में शामिल करने का मामला अभी अदालत में लंबित होने के कारण यह मुद्दा और संवेदनशील माना जा रहा है.
IREF ने APEDA को सुझाव दिया है कि सर्वे को दो हिस्सों में किया जाए. पहला हिस्सा पारंपरिक GI क्षेत्र वाले राज्यों का हो और दूसरा उन राज्यों का जहां बासमती की खेती बढ़ रही है, जैसे मध्य प्रदेश और राजस्थान. संगठन का कहना है कि इससे उत्पादन का वास्तविक और पारदर्शी आकलन सामने आ सकेगा. साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उगाई जा रही किस्मों और बाजार मांग का बेहतर विश्लेषण भी संभव होगा.
IREF ने कहा है कि उसके पास पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और अन्य बासमती क्षेत्रों में निर्यातकों, राइस मिलर्स और स्थानीय कारोबारी नेटवर्क का बड़ा आधार है. ऐसे में वह सर्वे टीमों और किसान समूहों के बीच समन्वय बनाने में मदद कर सकता है. इसके अलावा सर्वे से जुड़ी जानकारी किसानों और कारोबारियों तक पहुंचाने, स्थानीय स्तर पर आंकड़ों की पुष्टि कराने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में किस किस्म की मांग है, इसकी जानकारी साझा करने में भी सहयोग देने की बात कही गई है.
IREF ने यह भी कहा है कि अगर APEDA उचित समझे तो संगठन तकनीकी बैठकों और स्टेकहोल्डर समीक्षा प्रक्रियाओं में भी भाग लेने को तैयार है. संगठन का मानना है कि इस तरह का संस्थागत सहयोग बासमती सर्वे की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करेगा. वहीं, निर्यात बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाने में भी मदद मिल सकती है.
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