केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)देश में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने अप्रैल-मई के दौरान क्षेत्रवार जोनल कॉन्फ्रेंस की व्यापक सीरीज शुरू करने का फैसला लिया है. केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर आयोजित होने वाली इन बैठकों में नीति, विज्ञान और जमीनी अनुभव को एक मंच पर लाकर कृषि विकास की ठोस रणनीति तैयार की जाएगी. इस श्रृंखला का पहला सम्मेलन 7 अप्रैल को जयपुर में होगा, जिसमें पश्चिमी क्षेत्र के प्रमुख राज्य शामिल होंगे. राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ इसमें हिस्सा लेंगे. इस बैठक में राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने और योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने पर खास जोर रहेगा.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि इसके बाद 17 अप्रैल को लखनऊ में उत्तर भारत के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. इसमें दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर सहित अन्य क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. वहीं, 24 अप्रैल को भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्र के राज्यों के लिए बैठक प्रस्तावित है, जहां बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की भागीदारी होगी.
इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए मई के अंत तक हैदराबाद और गुवाहाटी में भी जोनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी. इन बैठकों में दक्षिण और उत्तर-पूर्वी राज्यों की विशिष्ट कृषि चुनौतियों, जलवायु परिस्थितियों और संभावनाओं पर विशेष चर्चा की जाएगी, ताकि क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को लागू किया जा सके.
इन कॉन्फ्रेंसों का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादकता सुधारने और नई तकनीकों के इस्तेमाल को तेज करना है. बैठकों में आत्मनिर्भर दलहन मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन, प्राकृतिक खेती और डिजिटल एग्रीकल्चर जैसी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी. साथ ही क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं की पहचान कर समाधान भी तय किए जाएंगे.
राज्यों में सफल रही योजनाओं और प्रयोगों को भी इन बैठकों में साझा किया जाएगा. सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, बागवानी, एग्री-स्टैक और वैल्यू चेन से जुड़े अच्छे मॉडल अन्य राज्यों में लागू करने की दिशा में रोडमैप तैयार किया जाएगा. इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और योजनाओं का प्रभाव बढ़ाने में मदद मिलेगी.
इन सम्मेलनों की खास बात यह होगी कि इसमें केवल अधिकारी ही नहीं, बल्कि प्रगतिशील किसान, किसान उत्पादक संगठन, कृषि स्टार्टअप, बैंक और निजी क्षेत्र भी शामिल होंगे. संवाद सत्रों के माध्यम से किसानों को सीधे अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा, जिससे नीतियों में जमीनी जरूरतों को शामिल किया जा सके.
सरकार का मानना है कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल से योजनाओं का असर तेजी से बढ़ेगा. इन बैठकों के जरिए पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत होगी, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा. केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया है कि इन जोनल कॉन्फ्रेंसों से कृषि क्षेत्र में निवेश, नवाचार और तकनीकी अपनाने की रफ्तार बढ़ेगी. इससे आने वाले समय में किसानों की आय, उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में ठोस कदम आगे बढ़ेंगे.
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