इथेनॉल पर सवाल उठने से पंजाब के किसानों की बढ़ी चिंता (AI Image)E20 पेट्रोल को लेकर देश में चल रही बहस अब पंजाब के कृषि क्षेत्र तक पहुंच गई है. किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की रफ्तार धीमी पड़ती है या नीति में बदलाव होता है तो इसका सीधा असर मक्का और गन्ना किसानों की आय पर पड़ सकता है. उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इथेनॉल उद्योग के विस्तार से इन दोनों फसलों की मांग बढ़ी है और किसानों को बेहतर दाम मिलने लगे हैं. यह मामला उस समय चर्चा में आया जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 1 अगस्त को आयोजित 'नेशनल टाउनहॉल' में E20 पेट्रोल को लेकर सवाल उठाए.
उन्होंने पुराने वाहनों पर इसके असर, माइलेज और उपभोक्ताओं को पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने जैसे मुद्दे उठाए. उन्होंने केंद्र सरकार से उपभोक्ताओं को E20 पेट्रोल के अलावा सादा पेट्रोल उपलब्ध कराने सहित 3 मांगें रखीं. यह कार्यक्रम मुख्य रूप से वाहन मालिकों और उपभोक्ताओं पर केंद्रित था, लेकिन इसकी चर्चा अब पंजाब के किसानों के बीच भी होने लगी है.
दरअसल, पंजाब में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है. वहीं, धान के विकल्प के रूप में राज्य में पिछले कुछ वर्षों में मक्का की खेती का रकबा भी बढ़ा है. केंद्र सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के चलते मक्का और गन्ने की अतिरिक्त मांग बनी है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मिला है और राज्य में इथेनॉल उद्योग को भी बढ़ावा मिला है.
माझा जोन आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र बहल ने कहा कि किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर इथेनॉल नीति को कमजोर किया गया या इसमें बदलाव हुआ, तो इसका सीधा असर फसलों के दाम और किसानों की आमदनी पर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल एक ओर किसानों के हितों की बात करते हैं, लेकिन दूसरी ओर ऐसी नीति का विरोध कर रहे हैं, जो किसानों की उपज की मांग बढ़ाती है. उन्होंने कहा कि वह खुद किसान होने के साथ कृषि व्यापार से भी जुड़े हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि इस तरह के विरोध से पंजाब के किसानों का क्या फायदा होगा?
नरेंद्र बहल ने कहा कि E20 पेट्रोल से वाहनों को नुकसान होने या माइलेज घटने जैसे दावों से किसानों के बीच अनिश्चितता का माहौल बन रहा है. उनका कहना है कि इथेनॉल कार्यक्रम के कारण पंजाब में मक्का की खेती का रकबा बढ़ा है. अगर इस नीति में बदलाव हुआ या इसके विस्तार की रफ्तार धीमी हुई तो मक्का की खेती में निवेश करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
नरेंद्र बहल ने कहा कि केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति से किसानों को नई उम्मीद मिली है और इसे पूरे देश में आगे बढ़ाया जाना चाहिए. उन्होंने किसानों और अरविंद केजरीवाल से भी कृषि पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों को ध्यान में रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि पंजाब के किसान पहले ही बासमती की कीमतों में वैश्विक उतार-चढ़ाव जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में आय के एक और संभावित स्रोत को कमजोर करना किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकता है.
नरेंद्र भेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इथेनॉल कार्यक्रम का विस्तार जारी रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि अगर किसानों या उपभोक्ताओं की कोई वास्तविक चिंता है तो सरकार उसका समाधान करे, लेकिन नीति को कमजोर न किया जाए. साथ ही उन्होंने अरविंद केजरीवाल से किसानों से सीधे संवाद करने और उनके हितों को समझने की भी अपील की.
भुरली गांव के किसान जगरूप सिंह ने कहा कि वह छोटे किसान हैं और पहले मक्का की फसल का उचित दाम नहीं मिलता था. उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिल शुरू होने के बाद अब उन्हें अच्छी कीमत मिलने लगी है, जिससे परिवार का गुजारा आसान हुआ है. उन्होंने सरकार से इथेनॉल कार्यक्रम को और बढ़ावा देने की मांग की, ताकि अन्य किसानों को भी इसका लाभ मिल सके.
एक अन्य किसान जगजीत सिंह ने कहा कि उनके पास चार से पांच एकड़ जमीन है और वह मक्का की खेती करते हैं. उन्होंने कहा कि अब फसल का अच्छा दाम मिल रहा है और वह नहीं चाहते कि इथेनॉल कार्यक्रम पर रोक लगे. उन्होंने कहा कि किसान पहले से आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं और अब कुछ राहत मिली है. अगर इस कार्यक्रम की रफ्तार धीमी पड़ती है तो किसानों की स्थिति फिर से खराब हो सकती है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने मक्का और गन्ने की स्थिर मांग तैयार कर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया है. इससे किसानों की पारंपरिक खरीद व्यवस्था पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई है. अगर नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है तो इसका असर किसानों के साथ-साथ इथेनॉल उद्योग और उससे जुड़े कृषि प्रोसेसिंग क्षेत्र में निवेश पर भी पड़ सकता है.
दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और शोध के बाद लागू किया गया है. पिछले ढाई वर्षों में करीब 20 करोड़ दोपहिया और लगभग 3 करोड़ चारपहिया वाहन E20 पेट्रोल का इस्तेमाल कर चुके हैं.
सरकार का कहना है कि अगर E20 से बड़े पैमाने पर वाहनों को नुकसान होता तो अब तक ऐसे मामले व्यापक रूप से सामने आ चुके होते. इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम कच्चे तेल के आयात में कमी, प्रदूषण घटाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. (पीयूष मिश्रा की रिपोर्ट)
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