BRICS दिल्ली घोषणा में किसानों के लिए क्या है खास? जानिए कृषि पर हुए 8 बड़े फैसले

BRICS दिल्ली घोषणा में किसानों के लिए क्या है खास? जानिए कृषि पर हुए 8 बड़े फैसले

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन में कृषि क्षेत्र को लेकर व्यापक सहयोग की दिशा तय की गई. नई दिल्ली घोषणा में कृषि अनुसंधान, किसानों के अधिकार, बीज प्रणाली, डिजिटल कृषि, टिकाऊ खेती, वन संरक्षण और कृषि व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमति बनी. सदस्य देशों ने खाद्य सुरक्षा और जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयासों पर जोर दिया.

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BRICS दिल्ली घोषणा में किसानों के लिए क्या है खास? जानिए कृषि पर हुए 8 बड़े फैसलेब्रिक्स 2026 में कृषि पर कई बड़े फैसले

नई दिल्ली में आयोजित BRICS 2026 शिखर सम्मेलन में कृषि क्षेत्र को केंद्र में रखते हुए सदस्य देशों ने कई महत्वपूर्ण पहलों पर सहमति जताई. "नई दिल्ली घोषणा" के तहत कृषि अनुसंधान, किसानों के अधिकारों की सुरक्षा, बीज प्रणालियों को मजबूत बनाने, डिजिटल खेती, कृषि व्यापार और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया गया है.

ब्रिक्स देशों ने माना कि बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ रहे दबाव के बीच कृषि क्षेत्र में आपसी सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए सम्मेलन में कृषि को लेकर आठ प्रमुख बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया.

कृषि रिसर्च के लिए बनेगा BRICS एग्री नेटवर्क

नई दिल्ली घोषणा के अनुसार सदस्य देशों के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए BRICS AGRIN नामक एक सहयोगी मंच को मजबूत किया जाएगा. यह नेटवर्क कृषि निवेश, संसाधनों, अनुसंधान और तकनीकी जानकारी के आदान-प्रदान का माध्यम बनेगा. इसके जरिए सदस्य देश एक-दूसरे के सफल कृषि मॉडल और सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख सकेंगे.

किसानों के अधिकार और बीज प्रणाली पर विशेष फोकस

सम्मेलन में किसानों के अधिकारों और बीज प्रणालियों को कृषि विकास का महत्वपूर्ण आधार माना गया. सदस्य देशों ने क्वालिटी वाले बीजों की उपलब्धता बढ़ाने, बीज संबंधी नीतियों को मजबूत करने और पारंपरिक कृषि ज्ञान और बीज संरक्षण पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई. इससे किसानों को बेहतर बीज, अधिक उत्पादन और जलवायु चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा

BRICS देशों ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कृषि क्षेत्र में लचीलापन बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की. इसके तहत एग्रोइकोलॉजी और Regenerative Agriculture के लिए उत्कृष्टता केंद्रों का एक नेटवर्क विकसित करने की योजना बनाई गई है. इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, जल और जैव विविधता का संरक्षण करना है.

डिजिटल कृषि और मत्स्य पालन में तकनीकी साझेदारी

घोषणा में डिजिटल तकनीकों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया. सदस्य देशों ने डिजिटल एग्रीकल्चर, एग्रीफ्यूचर, एग्रीफॉरेस्ट्री, फिशरीज और एक्वाकल्चर के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा आधारित खेती, स्मार्ट कृषि उपकरण और डिजिटल सलाह सेवाओं के विस्तार को भी बढ़ावा दिया जाएगा.

निष्पक्ष कृषि व्यापार पर जोर

वैश्विक कृषि बाजार में उभरती चुनौतियों के बीच BRICS देशों ने निष्पक्ष और संतुलित कृषि व्यापार की वकालत की. सदस्य देशों ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (WTO) के दायरे में ऐसी नीतियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए जो छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा करते हुए कृषि उत्पादों के व्यापार को आसान बनाएं.

वनस्पति तेल क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा

खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता को देखते हुए सदस्य देशों ने टिकाऊ तरीके से वनस्पति तेलों के उत्पादन और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर सहमति जताई. इस पहल का उद्देश्य वैश्विक खाद्य तेल सप्लाई चेन को अधिक स्थिर और टिकाऊ बनाना है.

प्राकृतिक संसाधनों और जंगलों के संरक्षण पर सहमति

नई दिल्ली घोषणा में पर्वतीय क्षेत्रों, जल संसाधनों, जंगलों, घासभूमि, मैंग्रोव और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई. BRICS देशों ने भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण, सूखा, धूल भरी आंधियों और जंगलों में आग जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयास करने का संकल्प लिया.

भारत के लिए क्यों अहम है यह घोषणा?

विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS 2026 की यह कृषि घोषणा भारत सहित सभी सदस्य देशों के किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. उन्नत बीज, डिजिटल तकनीक, जलवायु अनुकूल खेती और कृषि अनुसंधान में सहयोग बढ़ने से कृषि उत्पादकता में सुधार आ सकता है. साथ ही खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में भी मदद मिलेगी.

नई दिल्ली में हुई यह घोषणा संकेत देती है कि भविष्य में BRICS देश केवल आर्थिक और राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कृषि और खाद्य सुरक्षा जैसे सीधे किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे.

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