न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ FTA को दी मंजूरीभारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को न्यूजीलैंड की संसद ने बुधवार, 16 सितंबर को मंजूरी दे दी. इस समझौते के पक्ष में 93 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 29 सांसदों ने विरोध में वोट दिया. संसद की मंजूरी के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के लागू होने का रास्ता साफ हुआ है. समझौते में कृषि क्षेत्र से जुड़े व्यापार और सहयोग को प्रमुखता दी गई है. इसके तहत न्यूजीलैंड में भारतीय कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम होगा. वहीं, दोनों देश कीवी फल, सेब और शहद जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता और तकनीकी क्षमताएं बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे.
भारत और न्यूजीलैंड कृषि क्षेत्र में रोपण सामग्री, अनुसंधान, तकनीकी सहायता, बाग प्रबंधन, फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं, आपूर्ति श्रृंखला और खाद्य सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सहयोग करेंगे. इस पहल का उद्देश्य कृषि उत्पादन की क्षमता और संबंधित क्षेत्रों में तकनीकी दक्षता को मजबूत करना है.
समझौते में भारत के कृषि उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार तक पहुंच का प्रावधान भी शामिल है. न्यूजीलैंड भारत से होने वाले सभी निर्यातों के लिए शुल्क-मुक्त प्रवेश देगा. इसमें सभी टैरिफ लाइनों को शामिल किया गया है.
भारत ने न्यूजीलैंड से आयात के मामले में 29.97 फीसदी टैरिफ लाइनों को बाहर रखा है. इनमें डेयरी, कई कृषि उत्पाद, चीनी, कुछ धातुएं और अन्य संवेदनशील वस्तुएं शामिल हैं. वहीं, न्यूजीलैंड को 70.03 फीसदी टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच दी गई है, जो दोनों देशों के कुल द्विपक्षीय व्यापार के 95 फीसदी हिस्से को कवर करती हैं.
समझौते के तहत लकड़ी, ऊन, भेड़ के मांस और कच्ची खाल जैसे उत्पादों पर 30 फीसदी टैरिफ लाइनों के शुल्क तत्काल समाप्त किए जाएंगे. इसके अलावा 35.60 फीसदी टैरिफ लाइनों पर शुल्क तीन, पांच, सात या 10 साल की अवधि में चरणबद्ध तरीके से हटाए जाएंगे.
कुछ उत्पादों पर शुल्क में कटौती की जाएगी, जबकि कुछ वस्तुओं के लिए सीमित मात्रा में आयात की व्यवस्था लागू होगी. इनमें मनुका शहद, सेब, कीवी फल और एल्ब्यूमिन शामिल हैं. इसके अलावा न्यूजीलैंड की शराब, दवाओं, पॉलिमर और कुछ एल्युमीनियम, लौह एवं इस्पात उत्पादों पर भी शुल्क में कमी का प्रावधान है.
समझौते का उद्देश्य भारत के कपड़ा और परिधान, चमड़ा एवं जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना है. इससे इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों और निर्यात क्षमता को समर्थन मिलने की उम्मीद है.
भारत और न्यूजीलैंड ने यह व्यापार समझौता 27 अप्रैल को किया था. समझौते में न्यूजीलैंड की ओर से भारत में 15 वर्षों के दौरान 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भी शामिल है. इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है.
भारत अब इस समझौते को जल्द से जल्द लागू करने की दिशा में काम कर रहा है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले सप्ताह कहा था कि यह समझौता अक्टूबर में प्रभावी हो सकता है. हालांकि, इसके लागू होने के लिए दोनों देशों की आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होना जरूरी है.
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने संसद की मंजूरी का स्वागत किया. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि इस समझौते से भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार तक न्यूजीलैंड की पहुंच बढ़ेगी और देश की आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिलेगा.
लक्सन ने कहा कि कई लोगों का मानना था कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता संभव नहीं है, लेकिन संसद में अंतिम मतदान के साथ यह समझौता आगे बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पहले कार्यकाल में भारत के साथ FTA करने का वादा किया था और उसे पूरा किया है.
प्रधानमंत्री के अनुसार, समझौते से न्यूजीलैंड में रोजगार और आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है. उन्होंने कहा कि भारत के 1.4 अरब उपभोक्ताओं तक न्यूजीलैंड के उत्पादों की पहुंच बनाना अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है.
समझौते में सेवाओं के क्षेत्र में न्यूजीलैंड की ओर से 118 क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएं की गई हैं. इसके अलावा 139 क्षेत्रों में भारत को मोस्ट-फेवर्ड-नेशन यानी सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र का दर्जा देने का प्रावधान है.
भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए भी इसमें नए अवसर शामिल हैं. टेंपरेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा के तहत हर साल 5,000 कुशल भारतीयों के लिए तीन वर्ष तक न्यूजीलैंड में रहने का रास्ता बनाया गया है. इसमें आयुष चिकित्सक, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ, संगीत शिक्षक और आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं निर्माण क्षेत्र के पेशेवर शामिल हैं.
वर्किंग हॉलिडे वीजा व्यवस्था के तहत हर साल 1,000 युवा भारतीय न्यूजीलैंड की यात्रा कर सकेंगे और 12 महीने तक वहां रह सकेंगे. समझौते में छात्रों की आवाजाही और पढ़ाई के बाद काम करने से जुड़े प्रावधान भी हैं. पात्र भारतीय छात्र पढ़ाई के दौरान हफ्ते में 20 घंटे तक काम कर सकेंगे. योग्यता के आधार पर उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद विस्तारित वर्क वीजा भी मिल सकेगा. (एएनआई)
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