बागपत के किसानों की जुबानी सरकार का रिपोर्ट कार्ड, गन्ने के भुगतान से बिजली तक बताई पूरी कहानी

बागपत के किसानों की जुबानी सरकार का रिपोर्ट कार्ड, गन्ने के भुगतान से बिजली तक बताई पूरी कहानी

बागपत की गन्ना बेल्ट में किसान तक ने किसानों से सीधे बातचीत की. किसानों ने बिजली, सिंचाई, खाद, गन्ने के दाम और भुगतान से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय साझा की. किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में बिजली और खाद की उपलब्धता बेहतर हुई है. कई किसानों ने समय पर गन्ना भुगतान और कानून-व्यवस्था में बदलाव की भी बात कही.

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बागपत के किसानों की जुबानी सरकार का रिपोर्ट कार्ड, गन्ने के भुगतान से बिजली तक बताई पूरी कहानीगन्ने की बेल्ट में किसानों का क्या है मूड?

उत्तर प्रदेश की सियासत में किसान हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है. पश्चिमी यूपी की बात हो तो किसानों के मुद्दे और भी अहम हो जाते हैं. इसी को समझने के लिए किसान तक की टीम बागपत की गन्ना बेल्ट में पहुंची और किसानों से सीधे बात की. खेतों में काम कर रहे किसानों से खेती, बिजली, पानी, खाद, गन्ने के भुगतान और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल किए गए. किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें कई स्तरों पर बदलाव महसूस हुआ है.

खेत में खड़ा किसान बता रहा है अपनी कहानी

बागपत की पहचान खेती और खास तौर पर गन्ने की खेती से जुड़ी है. यहां बड़ी संख्या में परिवारों की आमदनी खेती पर निर्भर है. खेतों में कहीं किसान जुताई करता दिखाई देता है, तो कहीं गन्ने की फसल खेतों में लहलहाती नजर आती है. किसान के लिए खेत सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि उसके परिवार की रोजी-रोटी का आधार है. किसान तक की टीम ने जब बागपत के किसानों से पूछा कि पिछले कुछ वर्षों में खेती से जुड़ी उनकी जिंदगी में क्या बदलाव आया है, तो बिजली, पानी, खाद और गन्ने के भुगतान जैसे मुद्दे सबसे ज्यादा सामने आए. किसानों ने अपने रोजमर्रा के अनुभव के आधार पर बताया कि इन सुविधाओं को लेकर उन्हें पहले की तुलना में बदलाव महसूस होता है.

बिजली को लेकर किसानों ने क्या कहा?

किसानों के लिए बिजली का सीधा संबंध सिंचाई से है. खेत में फसल खड़ी है तो उसे समय पर पानी देना जरूरी है. अगर बिजली उपलब्ध नहीं होगी तो किसान को ट्यूबवेल चलाने में परेशानी होगी और इसका असर फसल पर भी पड़ सकता है. बागपत के किसानों का कहना है कि बिजली की उपलब्धता में पहले के मुकाबले सुधार हुआ है. उनका कहना है कि अब खेतों की सिंचाई के लिए रात में बिजली का इंतजार करने की परेशानी पहले जैसी नहीं है. किसानों के मुताबिक बिजली की बेहतर उपलब्धता से सिंचाई का काम कुछ आसान हुआ है. किसान के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सिंचाई का समय फसल की जरूरत के हिसाब से तय करना पड़ता है. समय पर पानी मिलने से किसान को खेती का काम व्यवस्थित तरीके से करने में मदद मिलती है.

खाद के लिए लंबी कतारों में कमी का दावा

खेती की लागत में खाद भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. फसल बोने से लेकर उसके विकास तक किसान को अलग-अलग तरह की खाद की जरूरत पड़ती है. ऐसे में खाद समय पर नहीं मिले तो किसान की परेशानी बढ़ जाती है. बागपत में जिन किसानों से बात की गई, उन्होंने बताया कि पहले खाद लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था. कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता था. किसानों का कहना है कि अब खाद लेने के लिए पहले जैसी लंबी कतारों का सामना नहीं करना पड़ता. हालांकि खाद की उपलब्धता और कीमत खेती के लिए लगातार महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं. किसान चाहते हैं कि उन्हें जरूरत के समय खाद आसानी से उपलब्ध हो, ताकि बुआई और फसल की देखभाल का काम प्रभावित न हो.

किसान के लिए पानी सिर्फ पानी नहीं, पूरी फसल है

बागपत जैसे खेती वाले इलाके में सिंचाई किसान की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल है. खेत में फसल खड़ी होने के बाद किसान की नजर आसमान और ट्यूबवेल दोनों पर रहती है. बारिश समय पर हो तो ठीक, लेकिन बारिश पर पूरी तरह निर्भर रहना हर फसल के लिए संभव नहीं होता. किसानों ने बताया कि बिजली और सिंचाई की व्यवस्था में बदलाव का असर सीधे खेती पर पड़ता है. उनका कहना है कि खेतों तक पानी पहुंचाना पहले की तुलना में आसान हुआ है. इससे किसान को अपनी फसल की सिंचाई करने में सुविधा मिलती है. किसान तक की टीम ने खेतों और ट्यूबवेल पर किसानों से बातचीत कर यह समझने की कोशिश की कि सरकारी व्यवस्था में बदलाव का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है. किसानों की बातचीत में सिंचाई और बिजली दोनों को लेकर उनके रोजमर्रा के अनुभव सामने आए.

रात में खेत जाने को लेकर भी बोले किसान

किसानों ने खेती के साथ कानून-व्यवस्था को भी अपनी जिंदगी से जोड़कर देखा. किसान के लिए कानून-व्यवस्था सिर्फ अपराध के आंकड़ों का विषय नहीं है. उसका मतलब यह भी है कि वह रात के समय अपने खेत तक कितनी आसानी से जा सकता है. बागपत के कुछ किसानों ने बताया कि पहले रात में खेत पर जाने को लेकर डर और चिंता रहती थी. किसानों का कहना है कि अब उन्हें पहले जैसी चिंता महसूस नहीं होती. उनका कहना है कि रात में खेतों की ओर जाने और वहां काम करने को लेकर स्थिति में बदलाव आया है. किसानों की यह बात बताती है कि गांव में कानून-व्यवस्था का असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर किस तरह पड़ता है. खेतों में कई बार सिंचाई, मोटर चलाने या दूसरी जरूरतों के लिए किसानों को रात में भी जाना पड़ता है.

बागपत और गन्ने का रिश्ता बहुत पुराना

बागपत की बात हो और गन्ने की बात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना बेल्ट में बागपत का महत्वपूर्ण स्थान है. यहां हजारों किसानों के लिए गन्ना उनकी आमदनी का बड़ा आधार है. गन्ने की खेती में किसान को कई महीनों तक मेहनत करनी पड़ती है. खेत तैयार करने से लेकर गन्ने की बुआई, सिंचाई, खाद और कटाई तक किसान लगातार काम करता है. इसके बाद गन्ना चीनी मिल तक पहुंचता है और किसान को अपने भुगतान का इंतजार रहता है. यही वजह है कि गन्ने का दाम और भुगतान किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हैं.

गन्ने के भुगतान को लेकर किसानों ने क्या कहा?

किसान तक की टीम ने जब बागपत के किसानों से गन्ने की खरीद और भुगतान को लेकर सवाल किया, तो किसानों ने पुराने अनुभव और मौजूदा व्यवस्था के बीच अंतर बताया. किसानों का कहना है कि पहले गन्ने के भुगतान को लेकर उन्हें परेशानी होती थी और पैसा मिलने में इंतजार करना पड़ता था. अब किसानों का दावा है कि भुगतान व्यवस्था में सुधार हुआ है और उन्हें पहले की तुलना में समय पर पैसा मिल रहा है. किसानों ने गन्ने के दाम में बढ़ोतरी को भी अपने लिए राहत से जोड़कर देखा. उनके मुताबिक जब गन्ने का भुगतान समय पर मिलता है और दाम में बढ़ोतरी होती है, तो खेती से जुड़े खर्चों को संभालने में मदद मिलती है.

हालांकि किसान के लिए सिर्फ गन्ने का दाम बढ़ना ही काफी नहीं है. समय पर भुगतान भी उतना ही जरूरी है. क्योंकि किसान को अगली फसल के लिए बीज, खाद, डीजल, बिजली, मजदूरी और दूसरे खर्चों का इंतजाम करना होता है.

खेत से चीनी मिल तक किसान की पूरी कहानी

गन्ने की फसल तैयार होने के बाद किसान उसे चीनी मिल तक पहुंचाता है. इसके बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू होती है. इसलिए किसान के लिए गन्ने की पूरी व्यवस्था खेत से लेकर मिल और फिर बैंक खाते तक जुड़ी हुई है. बागपत में किसानों से बातचीत के दौरान गन्ने की खरीद, मिलों की व्यवस्था और भुगतान से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई. किसानों ने बताया कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गन्ना बेचने के बाद उसका पैसा समय पर खाते में पहुंचे. किसानों की नजर में खेती की सफलता का एक बड़ा हिस्सा इसी बात से जुड़ा है कि उनकी मेहनत का पैसा उन्हें कितनी जल्दी मिलता है.

किसानों की जुबानी सामने आई सरकार के कामकाज की तस्वीर

बागपत में किसानों से बातचीत के दौरान बिजली, पानी, खाद, गन्ने का भुगतान और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे बार-बार सामने आए. किसानों ने बताया कि उनके लिए सरकार के कामकाज को समझने का तरीका बहुत सीधा है. उनके लिए यह मायने रखता है कि खेत की सिंचाई के लिए बिजली मिल रही है या नहीं, खाद के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है या नहीं, फसल को पानी समय पर मिल रहा है या नहीं और गन्ना बेचने के बाद पैसा खाते में कब पहुंच रहा है. यानी किसान के लिए सरकारी योजनाओं और व्यवस्थाओं का असर कागज पर नहीं, बल्कि सीधे खेत में दिखाई देता है.

किसानों ने मौजूदा सरकार को बताया किसान हितैषी

बागपत में जिन किसानों से किसान तक की टीम ने बातचीत की, उनमें से कई किसानों ने बिजली, पानी, खाद, गन्ने के दाम और भुगतान जैसी व्यवस्थाओं में बदलाव का जिक्र किया. किसानों ने अपने अनुभव के आधार पर मौजूदा सरकार के कामकाज को किसान हितैषी बताया. बागपत की गन्ना बेल्ट में किसानों की बातों से यह साफ हुआ कि उनके लिए बड़े राजनीतिक मुद्दों से ज्यादा महत्व उन समस्याओं का है, जिनका सामना वे रोज खेत में करते हैं. बिजली से लेकर सिंचाई और खाद से लेकर गन्ने के भुगतान तक, किसान अपने अनुभव के आधार पर सरकार के कामकाज को देखते हैं.

आखिर किसान के लिए खेत ही उसकी सबसे बड़ी दुनिया है. खेत में पानी पहुंचा, खाद समय पर मिली, फसल बिकी और उसकी मेहनत का पैसा समय पर खाते में आया- किसान के लिए बदलाव का मतलब काफी हद तक यही है. (मनुदेव का इनपुट)

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