अमेरिका में गिरेगा मक्का उत्पादनअमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की सितंबर विश्व कृषि आपूर्ति एवं मांग अनुमान (WASDE) रिपोर्ट ने वैश्विक अनाज और तिलहन बाजारों की दिशा बदलने के संकेत दिए हैं. रिपोर्ट में अमेरिका के मक्का उत्पादन का अनुमान घटाया गया है, जबकि सोयाबीन की पैदावार, निर्यात और कीमतों का अनुमान बढ़ाया गया है. कृषि जिंसों के कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिपोर्ट का असर आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ भारत जैसे आयातक और निर्यातक देशों पर भी दिखाई दे सकता है.
USDA ने 2026 के अमेरिकी मक्का उत्पादन का अनुमान 15.8 अरब बुशल लगाया है, जो अगस्त के अनुमान से 21.3 करोड़ बुशल कम है. यह कटौती मुख्य रूप से प्रति एकड़ उत्पादकता अनुमान घटाए जाने के कारण की गई है. विभाग ने मक्का की औसत उपज का अनुमान 178.5 बुशल प्रति एकड़ किया है, जो पिछले अनुमान से 2.2 बुशल कम है. इसके अलावा कटाई योग्य क्षेत्रफल में भी मामूली कमी दर्ज की गई है.
उत्पादन घटने के बावजूद USDA ने मक्का निर्यात का अनुमान 3.3 अरब बुशल पर बरकरार रखा है. इसी कारण 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए मक्का का अंतिम भंडार (Ending Stocks) घटकर 1.6 अरब बुशल रह गया है. सप्लाई और भंडार में आई इस कमी के चलते USDA ने किसानों को मिलने वाली औसत मक्का कीमत का अनुमान 30 सेंट बढ़ाकर 4.80 डॉलर प्रति बुशल कर दिया है.
दूसरी ओर सोयाबीन के मोर्चे पर तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई दी. USDA ने अमेरिकी सोयाबीन उत्पादन अनुमान बढ़ाकर 4.5 अरब बुशल कर दिया है, जो अगस्त के अनुमान से 1.6 करोड़ बुशल अधिक है. इसके पीछे बेहतर उत्पादकता और कटाई योग्य क्षेत्र में मामूली बढ़ोतरी को प्रमुख कारण बताया गया है. विभाग ने सोयाबीन की औसत उपज 52.8 बुशल प्रति एकड़ रहने का अनुमान लगाया है.
सोयाबीन के निर्यात अनुमान में भी बढ़ोतरी की गई है. USDA के अनुसार 2026-27 में अमेरिकी सोयाबीन निर्यात 1.69 अरब बुशल तक पहुंच सकता है. हाल के महीनों में चीन की बढ़ी हुई खरीदारी को इसके पीछे प्रमुख वजह माना जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद सोयाबीन का अंतिम भंडार घटकर 31 करोड़ बुशल रह गया है.
मजबूत मांग और घटते भंडार के कारण USDA ने सोयाबीन की औसत कीमत का अनुमान 60 सेंट बढ़ाकर 12 डॉलर प्रति बुशल कर दिया है. वहीं सोयाबीन खली (Soybean Meal) की कीमतों का अनुमान भी 30 डॉलर बढ़ाकर 340 डॉलर प्रति शॉर्ट टन कर दिया गया है. हालांकि सोयाबीन तेल की कीमत का अनुमान 70 सेंट प्रति पाउंड पर स्थिर रखा गया है.
रिपोर्ट में गेहूं को लेकर बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं. अमेरिका के 2026-27 गेहूं सप्लाई और खपत संतुलन को लगभग जस का तस रखा गया है. हालांकि निर्यात श्रेणियों में कुछ संशोधन किए गए हैं. सफेद गेहूं के निर्यात अनुमान में 2 करोड़ बुशल की बढ़ोतरी की गई है, जबकि हार्ड रेड विंटर और स्प्रिंग गेहूं के निर्यात अनुमान में कटौती की गई है. गेहूं की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 6.40 डॉलर प्रति बुशल कर दिया गया है.
धान (चावल) के मामले में USDA ने उत्पादन अनुमान में मामूली कटौती की है. लंबे दाने वाले चावल (Long Grain Rice) के उत्पादन में विशेष रूप से गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक चावल का अंतिम स्टॉक पिछले साल की तुलना में 31 प्रतिशत तक कम हो सकता है.
कपास क्षेत्र के लिए भी रिपोर्ट में उत्पादन घटने का अनुमान जताया गया है. USDA ने अमेरिकी कपास उत्पादन अनुमान में 3 प्रतिशत की कटौती कर इसे 1.32 करोड़ गांठ (Bales) कर दिया है. कम उत्पादकता के कारण यह संशोधन किया गया है. वहीं कपास की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 78 सेंट प्रति पाउंड कर दिया गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि मक्का के कम उत्पादन और सोयाबीन की मजबूत मांग से वैश्विक फीड उद्योग, खाद्य तेल बाजार और तिलहन व्यापार प्रभावित हो सकता है. खासतौर पर सोया खली की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का असर पोल्ट्री उद्योग की लागत पर पड़ सकता है, जबकि मक्का के ऊंचे भाव दुनिया भर के पशु आहार बाजार को प्रभावित कर सकते हैं. USDA की यह रिपोर्ट आने वाले महीनों में वैश्विक कृषि जिंस बाजार की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण रिपोर्ट मानी जा रही है.
अमेरिका में मक्का उत्पादन घटने और सोयाबीन और सोया खली के दाम बढ़ने से भारतीय पोल्ट्री उद्योग की लागत बढ़ सकती है. पोल्ट्री फीड में मक्का और सोया खली की बड़ी हिस्सेदारी होती है, इसलिए इनके भाव बढ़ने का सीधा असर ब्रॉयलर और अंडा उत्पादन लागत पर पड़ सकता है. वहीं, मक्का और सोयाबीन किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी.
वैश्विक बाजार में तेजी रहने पर सोयाबीन, सरसों और अन्य तिलहन फसलों के भाव मजबूत हो सकते हैं, जिससे किसानों को फायदा मिलेगा. हालांकि खाद्य तेल उद्योग के लिए कच्चा माल महंगा पड़ सकता है और घरेलू खाद्य तेल कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
कुल मिलाकर, USDA की रिपोर्ट भारतीय पोल्ट्री सेक्टर के लिए लागत बढ़ने का संकेत देती है, जबकि मक्का और तिलहन उत्पादक किसानों के लिए यह सकारात्मक साबित हो सकती है.
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