बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ के हालात (फोटो-X@samrat4bjp)बिहार में भारी बारिश के बाद नदियों के उफान ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर कर दिया है. राज्य के 12 जिलों में करीब 22.42 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. राजधानी पटना में गंगा का जलस्तर रविवार सुबह अपने पिछले उच्चतम बाढ़ (HFL) से ऊपर पहुंच गया, जिसके बाद निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है. पटना के गांधी घाट पर रविवार सुबह 6 बजे गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया. यह 21 अगस्त को दर्ज किए गए पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर से 0.05 मीटर अधिक है. वहीं पंडारक में गंगा 43.92 मीटर पर बह रही थी, जो 16 अगस्त के 43.73 मीटर के पिछले HFL से 0.19 मीटर ऊपर है.
अधिकारियों के मुताबिक, गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर अगले एक से तीन दिनों में हाथीदह समेत पटना के दूसरे गेज स्टेशनों पर भी पड़ सकता है. जल संसाधन विभाग ने हालात को देखते हुए लगातार निगरानी रखने और संवेदनशील इलाकों में एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
बिहार की कई प्रमुख नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. गंडक डुमरियाघाट और हाजीपुर, कोसी बलतारा और कुरसेला, बूढ़ी गंडक खगड़िया और गंगा हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान के ऊपर है. इसके अलावा पुनपुन श्रीपालपुर, बागमती बेनीबाद और घाघरा दरौली में भी जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है.
बाढ़ का असर पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल में बताया गया है. इन जिलों में करीब 22.42 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं.
बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए विभिन्न जिलों में 190 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं. फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए 1,429 नावें लगाई गई हैं. राहत और बचाव अभियान के लिए राज्य आपदा मोचन बल की 27 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 10 टीमें भी अलग-अलग जिलों में तैनात हैं.
पुनपुन और परसा बाजार स्टेशनों को जोड़ने वाले पुल के पास पानी का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ने के बाद पूर्व मध्य रेलवे ने पटना-गया रेलखंड पर कुछ ट्रेनों को रद्द किया है, जबकि कुछ ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया है.
जल संसाधन विभाग की एडवाइजरी में कहा गया है कि गंगा का पानी हाथीदह में भी पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकता है. इसे देखते हुए बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है.
बिहार में बाढ़ की मौजूदा स्थिति के पीछे राज्य और पड़ोसी झारखंड में हुई भारी बारिश को प्रमुख वजह बताया गया है. सितंबर में अब तक बिहार में 69.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य से 55 फीसदी अधिक है. मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है.
अधिकारियों को तटबंधों, संवेदनशील जगहों और निचले इलाकों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है. प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को नदी के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है. प्रशासन को नावों के संचालन पर नजर रखने, ओवरलोडिंग रोकने और स्थानीय लोगों को समय पर स्थिति की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं.
बिहार में बिगड़ती बाढ़ की स्थिति को लेकर विपक्ष ने केंद्र से इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है. आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया कि राज्य का 76 फीसदी हिस्सा बाढ़ से प्रभावित है और 19 जिलों में 20 लाख से ज्यादा लोग संकट में हैं.
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि बाढ़ में पशुधन बह गया है, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है और हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति बर्बाद हुई है. उन्होंने बिहार सरकार पर बाढ़ प्रभावित लोगों की स्थिति के प्रति उदासीन रहने का आरोप लगाया.
तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और बिहार के लिए विशेष वित्तीय सहायता देने की मांग की. उन्होंने बचाव अभियान में भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर लगाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेने और राहत पैकेज की घोषणा करने की अपील भी की. (पीटीआई)
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