अब अंतरिक्ष से होगी खेतों की चौकीदारी, ISRO ने लॉन्च किया EOS-05 सैटेलाइट

अब अंतरिक्ष से होगी खेतों की चौकीदारी, ISRO ने लॉन्च किया EOS-05 सैटेलाइट

इसरो ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 (GISAT-1A) सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया. यह भारत का पहला जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट है, जो हर 30 मिनट में पूरे देश की तस्वीर भेज सकेगा. इससे आपदा प्रबंधन, कृषि, पर्यावरण निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ी मजबूती मिलेगी.

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अब अंतरिक्ष से होगी खेतों की चौकीदारी, ISRO ने लॉन्च किया EOS-05 सैटेलाइटबाएं से- इसरो का ये सैटेलाइट अंतरिक्ष से रखेगा सीमाओं पर नजर. (Photo: ISRO)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है. इस सैटेलाइट को 4 सितंबर 2026 की सुबह श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया.

करीब 2,367 किलोग्राम वजनी EOS-05, जिसे GISAT-1A के नाम से भी जाना जाता है, भारत का पहला ऐसा सैटेलाइट है जो जियोसिंक्रोनस कक्षा से लगातार पृथ्वी की निगरानी करेगा. यह मिशन पिछले आठ महीनों में इसरो की सबसे महत्वपूर्ण लॉन्चिंग में से एक माना जा रहा है.

क्या है EOS-05 की खासियत?

EOS-05 को पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा. इस ऊंचाई से यह भारतीय उपमहाद्वीप पर लगातार नजर रख सकेगा.

सामान्य रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट किसी क्षेत्र की तस्वीर कुछ दिनों में एक बार लेते हैं, लेकिन EOS-05 पूरे भारत की तस्वीर हर 30 मिनट में भेज सकेगा. वहीं, रणनीतिक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की तस्वीरें सिर्फ 5 मिनट के अंतराल पर उपलब्ध कराई जा सकेंगी.

सैटेलाइट में 700 मिलीमीटर का अत्याधुनिक टेलीस्कोप लगाया गया है, जो विजिबल, नियर-इन्फ्रारेड और शॉर्ट-वेव इन्फ्रारेड बैंड में डेटा जुटाएगा.

आपदा प्रबंधन और कृषि को होगा फायदा

EOS-05 का सबसे बड़ा उपयोग आपदा प्रबंधन में होगा. इसके जरिए बाढ़, चक्रवात, जंगल की आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी.

कृषि क्षेत्र में भी यह सैटेलाइट अहम भूमिका निभाएगा. इससे फसलों की स्थिति, खेतों में नमी, फसलों की सेहत और मौसम से जुड़े प्रभावों का आकलन किया जा सकेगा. यह जानकारी किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी.

इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण, शहरी योजना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों में भी EOS-05 महत्वपूर्ण योगदान देगा.

2021 की असफलता के बाद बड़ी उपलब्धि

इस मिशन को इसरो की वापसी के रूप में भी देखा जा रहा है. साल 2021 में GSLV-F10 मिशन के तहत भेजा गया EOS-03 (GISAT-1) सैटेलाइट क्रायोजेनिक स्टेज में आई तकनीकी खराबी के कारण अपनी निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था.

अब EOS-05 के जरिए इसरो ने उसी क्षमता को दोबारा हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. यह मिशन दिखाता है कि इसरो ने पिछली चुनौतियों से सीख लेकर अपनी तकनीक को और मजबूत बनाया है.

'नॉटी बॉय' रॉकेट की सफल उड़ान

EOS-05 को ले जाने वाला GSLV-F17, GSLV श्रृंखला का 19वां मिशन है. लगभग 51.7 मीटर ऊंचे और 420.5 टन वजनी इस रॉकेट को अतीत में कुछ असफलताओं के कारण अंतरिक्ष जगत में मजाकिया तौर पर "नॉटी बॉय" भी कहा जाता रहा है.

हालांकि, हाल के वर्षों में GSLV ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है और इस मिशन की सफलता ने इसकी विश्वसनीयता को और मजबूत किया है.

भारत को मिलेगा नया रणनीतिक फायदा

EOS-05 को पहले सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा, जहां से यह अपने इंजन की मदद से अंतिम कक्षा तक पहुंचेगा.

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सैटेलाइट के संचालन से भारत को पहली बार अंतरिक्ष से लगातार निगरानी की क्षमता मिलेगी. इससे आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत होगी, कृषि योजना अधिक सटीक बनेगी और सुरक्षा एजेंसियों को भी समय पर महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी.

कुल मिलाकर, EOS-05 मिशन भारत की अंतरिक्ष तकनीक, आत्मनिर्भरता और पृथ्वी निगरानी क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है.

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