UP में गन्ना किसानों के बकाये पर इलाहाबाद HC सख्त, DM को वसूली के लिए दिए सख्त निर्देश

UP में गन्ना किसानों के बकाये पर इलाहाबाद HC सख्त, DM को वसूली के लिए दिए सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के बकाये को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने करीब 1,936 करोड़ रुपये के बकाये की वसूली के लिए सभी जिलाधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

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UP में गन्ना किसानों के बकाये पर इलाहाबाद HC सख्त, DM को वसूली के लिए दिए सख्त निर्देशगन्ना किसानों के बकाये पर हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के बकाये की वसूली में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) के तहत किसानों का करीब 1,936 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है. इसमें मूलधन के साथ ब्याज की रकम भी शामिल है. कोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दिया है कि वे किसानों को मिलने वाली बकाया राशि की वसूली के लिए हर संभव प्रयास करें. यह आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 31 अगस्त को किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी.एम. सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया. मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी.

15% की जगह 12% ब्याज लगाने पर सवाल

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने उन मामलों पर भी सवाल उठाया, जहां रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करते समय तय 15 प्रतिशत ब्याज की जगह 12 प्रतिशत ब्याज लगाया गया. इससे करीब 170 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की वसूली नहीं हो सकी. कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए चार पूर्व गन्ना आयुक्तों को व्यक्तिगत रूप से मामले में पक्षकार बनाया है और उन्हें नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने उनसे जवाब मांगा है कि 23 दिसंबर 2021 के हाई कोर्ट के फैसले के बावजूद कम ब्याज दर पर रिकवरी सर्टिफिकेट क्यों जारी किए गए.

इन अधिकारियों से यह भी पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए. कोर्ट के सामने दी गई जानकारी के मुताबिक संबंधित अवधि में गन्ना आयुक्त के पद पर संजय आर. भुसरेड्डी, प्रभु एन. सिंह, प्रमोद कुमार उपाध्याय और मिनिस्थी एस. भुसरेड्डी रहे थे. ये चारों अधिकारी जून 2025 में रिटायर हो गए थे.

कुल बकाये में से 3,318 करोड़ किए गए वसूल

गन्ना आयुक्त की ओर से कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, अलग-अलग रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत गन्ना किसानों के बकाये की मूल राशि करीब 4,405 करोड़ रुपये थी. इसमें से लगभग 3,318.50 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है. इसके बावजूद करीब 1,087 करोड़ रुपये अभी भी बाकी है. इसके अलावा 15 प्रतिशत की दर से ब्याज की रकम करीब 849.52 करोड़ रुपये बनती है. कोर्ट को बताया गया कि इस ब्याज की राशि की अब तक वसूली नहीं हुई है. इस तरह किसानों का कुल करीब 1,936 करोड़ रुपये बकाया है, जिसमें मूल रकम और ब्याज दोनों शामिल हैं.

2023-24 में भी किसानों को देर से हुआ भुगतान

कोर्ट के सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023-24 में राज्य सरकार द्वारा तय कीमत यानी SAP के आधार पर 36 जिलों में किसानों को करीब 35,893 करोड़ रुपये के गन्ने का भुगतान किया जाना था. इसमें से करीब 17,478 करोड़ रुपये, यानी 48.70 प्रतिशत राशि, कानूनी तौर पर तय 14 दिनों की समय-सीमा के भीतर किसानों को दी गई. वहीं, करीब 18,391 करोड़ रुपये, यानी 51.24 प्रतिशत भुगतान, तय समय के बाद किया गया. देरी से किए गए इन भुगतानों पर 15 प्रतिशत की दर से करीब 614.74 करोड़ रुपये ब्याज बनता है. कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि इस ब्याज की भी अब तक एक भी रुपये की वसूली नहीं की गई है.

कोर्ट ने मिलवार बकाये का विवरण मांगा

हाई कोर्ट ने गन्ना आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे सभी जिलों से किसानों के बकाये की पूरी जानकारी जुटाएं. साथ ही यह भी बताएं कि किसानों का पूरा बकाया कब तक वसूल होने की संभावना है. कोर्ट ने ब्याज कैसे और कब से जोड़ा जाए, इस पर भी जानकारी मांगी है. कोर्ट ने पूछा है कि ब्याज की गणना किसान का पैसा बकाया होने की तारीख से की जाएगी और भुगतान होने तक जारी रहेगी या रिकवरी सर्टिफिकेट जारी होने तक ही की जाएगी. कोर्ट ने गन्ना आयुक्त से अगली सुनवाई में, अगर संभव हो, तो हर चीनी मिल पर कितना पैसा बकाया है, इसकी पूरी जानकारी देने को कहा है. (PTI)

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