त्रिपुरा से किए गए चावल एक्सपोर्ट (सांकेतिक तस्वीर-ANI)त्रिपुरा के एथनिक और ऑर्गेनिक चावल अब यूरोपीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA ने त्रिपुरा से 18 मीट्रिक टन NPOP प्रमाणित पारंपरिक चावल की खेप को ऑस्ट्रिया और नीदरलैंड्स के लिए रवाना करने में मदद की है. 2 सितंबर को रवाना की गई इस खेप में त्रिपुरा में उगाई जाने वाली चार खास पारंपरिक चावल किस्में शामिल हैं. इनमें एरोमैटिक काली खसा राइस, एरोमैटिक हरिनारायण राइस, बिरोन राइस यानी सफेद चिपचिपा चावल और मैमी हांगा राइस यानी ब्लैक राइस शामिल हैं.
निर्यात के लिए चावल की खरीद सीधे स्थानीय किसान उत्पादक कंपनियों यानी FPCs से की गई. इन FPCs को त्रिपुरा स्टेट ऑर्गेनिक फार्मिंग डेवलपमेंट एजेंसी (TSOFDA) का समर्थन मिला हुआ है. अंतरराष्ट्रीय बाजार तक इस खेप को पहुंचाने की जिम्मेदारी सोनीपत स्थित निर्यातक कंपनी मेसर्स प्रतीति ऑर्गेनिक फूड्स ने संभाली.
इस निर्यात खेप का रास्ता APEDA की ओर से अगस्त में त्रिपुरा में आयोजित रिवर्स बायर-सेलर मीट से तैयार हुआ. इस कार्यक्रम के जरिए राज्य के उत्पादकों और संभावित विदेशी खरीदारों को सीधे जोड़ा गया. इसके बाद त्रिपुरा के इन पारंपरिक चावलों को यूरोपीय बाजारों तक भेजने का अवसर मिला.
ऑस्ट्रिया और नीदरलैंड्स जैसे यूरोपीय देशों में खाद्य सुरक्षा, उत्पाद की ट्रेसबिलिटी और प्रमाणन को लेकर काफी कड़े मानक हैं. ऐसे में NPOP प्रमाणन के साथ इन उत्पादों का निर्यात त्रिपुरा के ऑर्गेनिक कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
इस सीधे निर्यात मॉडल से जुड़े किसानों को घरेलू बाजार की मौजूदा कीमतों की तुलना में 40 फीसदी तक अधिक मूल्य मिलने की संभावना जताई गई है. इससे पारंपरिक फसलों की खेती को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.
खेप को रवाना करने के कार्यक्रम में त्रिपुरा के कृषि मंत्री रतन लाल नाथ, APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव, त्रिपुरा के कृषि सचिव अपूर्व रॉय और APEDA की सचिव डॉ. सस्वती बोस समेत कई अधिकारी मौजूद रहे.
त्रिपुरा के कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा कि NPOP प्रमाणित एथनिक चावल का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात राज्य के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसानों, FPCs और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों की मेहनत का परिणाम है.
उन्होंने त्रिपुरा में ऑर्गेनिक और पारंपरिक कृषि उत्पादों की बड़ी संभावनाएं बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास किसानों को नए बाजारों तक पहुंच दिलाएंगे. इससे उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे और टिकाऊ आजीविका के अवसर भी मजबूत होंगे.
APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने कहा कि त्रिपुरा से NPOP प्रमाणित एथनिक चावल का निर्यात यह दिखाता है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के ऑर्गेनिक और कृषि निर्यात में बड़ी भूमिका निभा सकता है.
उन्होंने कहा कि किसानों और FPCs को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के साथ प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और गुणवत्ता व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है. APEDA आगे भी त्रिपुरा सरकार और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर राज्य के विशिष्ट कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए काम करता रहेगा. (एएनआई)
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