पारंपरिक खेती छोड़ मिर्च की खेती अपनाई, 2 बीघा में ₹2.5 लाख कमाकर किसान बना मिसाल

पारंपरिक खेती छोड़ मिर्च की खेती अपनाई, 2 बीघा में ₹2.5 लाख कमाकर किसान बना मिसाल

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के किसान इशरार खान ने पारंपरिक खेती छोड़ मिर्च सहित उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है. महज 2 बीघा में वीएनआर-285 किस्म की मिर्च उगाकर उन्होंने 2 से 2.5 लाख रुपये तक की आय अर्जित की.

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पारंपरिक खेती छोड़ मिर्च की खेती अपनाई, 2 बीघा में ₹2.5 लाख कमाकर किसान बना मिसाल

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के मुंगावली विकासखंड के ग्राम ततारपुर के किसान इशरार खान ने पारंपरिक खेती छोड़कर उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है. पहले जहां वे सोयाबीन और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलें उगाते थे, वहीं अब मिर्च सहित विभिन्न सब्जियों की खेती से लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं. उनकी सफलता अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक बन गई है.

2023 में शुरू की उद्यानिकी फसलों की खेती

इशरार खान ने वर्ष 2023 से उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू की. उन्होंने मिर्च, बैंगन, लौकी, गिलकी, टमाटर और धनिया जैसी फसलों का उत्पादन प्रारंभ किया. वैज्ञानिक तरीके और विभागीय मार्गदर्शन के कारण उन्हें कम समय में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिलने लगा.

2 बीघा में वीएनआर-285 मिर्च से 2.5 लाख तक की आय

वर्तमान में किसान ने 2 बीघा भूमि में वीएनआर-285 किस्म की मिर्च की खेती की है.इस फसल से उन्हें लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई. तैयार मिर्च को अशोकनगर और पिपरई की मंडियों में बेचकर उन्हें अच्छा बाजार भाव मिला, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई.

ड्रिप सिंचाई से बढ़ा उत्पादन, घटी लागत

उद्यानिकी विभाग के सहयोग से किसान को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाने के लिए 70,125 रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ. ड्रिप सिंचाई अपनाने से पानी की बचत हुई, सिंचाई की लागत कम हुई और फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन दोनों में सुधार आया.

सरकारी योजनाओं का मिला भरपूर लाभ

किसान ने उद्यानिकी विभाग की मसाला क्षेत्र विस्तार योजना के तहत अनुदान पर मिर्च की खेती की.विभागीय तकनीकी सलाह और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से उन्हें बेहतर उत्पादन मिला और खेती अधिक लाभकारी साबित हुई.

पारंपरिक खेती की तुलना में दोगुना मुनाफा

पहले इशरार खान सोयाबीन और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे, जिनसे सीमित आय होती थी.लेकिन उद्यानिकी फसलों की ओर रुख करने के बाद उनकी आमदनी लगभग दोगुनी हो गई है.कम भूमि में अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार मूल्य मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है.

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने इशरार खान

इशरार खान की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और उद्यानिकी फसलों को अपनाएं, तो कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित की जा सकती है. उनकी सफलता आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है.

 

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