खाली छत से शुरू की खेती, मशरूम और सब्जियों से कमा रहीं 40 हजार महीना, बांदीपोरा की आसिया बनीं मिसाल

खाली छत से शुरू की खेती, मशरूम और सब्जियों से कमा रहीं 40 हजार महीना, बांदीपोरा की आसिया बनीं मिसाल

जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा की आसिया अकबर ने सीमित जगह में खेती को कमाई का जरिया बनाया है. घर के अंदर मशरूम उत्पादन से शुरुआत करने के बाद उन्होंने छत पर सब्जियां, मसाले और पौध तैयार करना शुरू किया. कृषि विभाग के मार्गदर्शन से उनका काम आगे बढ़ा और अब वह इससे हर महीने करीब 35 से 40 हजार रुपये तक कमा रही हैं.

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खाली छत से शुरू की खेती, मशरूम और सब्जियों से कमा रहीं 40 हजार महीना, बांदीपोरा की आसिया बनीं मिसालमशरूम उत्‍पादन से खुली कमाई की राह

जम्मू-कश्मीर के उत्तरी कश्मीर स्थित बांदीपोरा जिले के नुसू गांव की आसिया अकबर, (आसिया बेगम) ने सीमित जगह को कमाई के साधन में बदलकर महिला उद्यमिता की मिसाल पेश की है. उनके पास खेती के लिए बड़ी जमीन नहीं थी, इसलिए उन्होंने घर के अंदर मशरूम उत्पादन से शुरुआत की और बाद में छत पर सब्जियां, मसाले और पौध तैयार करने का काम शुरू किया. आसिया ने कुछ साल पहले इनडोर मशरूम की खेती शुरू की थी. शुरुआती अनुभव के बाद उन्होंने अपने काम का विस्तार करते हुए अलग-अलग तरह की सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों को भी शामिल किया. कृषि विभाग से मिले मार्गदर्शन ने उन्हें खेती से जुड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद की.

बेकार पड़ी छत बनी कमाई का जरिया

घर की जिस छत का पहले खेती के लिए इस्तेमाल नहीं होता था, वही अब आसिया के छोटे कृषि उद्यम का अहम हिस्सा बन चुकी है. वह यहां सब्जियों, मसालों और पौध की नर्सरी तैयार करती हैं, जबकि मशरूम उत्पादन के लिए घर के अंदर उपलब्ध जगह का इस्तेमाल करती हैं.

हर महीने 35 से 40 हजार रुपये की आमदनी

मशरूम, सब्जियां, मसाले और पौध बेचकर आसिया अब हर महीने करीब 35,000 से 40,000 रुपये तक की कमाई कर रही हैं. उनके उत्पादों की मांग केवल गांव तक सीमित नहीं है और उत्तर कश्मीर के अलग-अलग इलाकों से भी ग्राहक उनके उत्पाद खरीदते हैं.

कम जमीन वाले किसानों के लिए उदाहरण

कश्मीर में छोटे उद्यमियों के सामने कृषि योग्य जमीन की उपलब्धता एक चुनौती हो सकती है. आसिया ने दिखाया है कि खेती के लिए हमेशा बड़े खेत की जरूरत नहीं होती और घर के अंदर या छत जैसी सीमित जगह का सही इस्तेमाल करके भी कृषि आधारित कारोबार खड़ा किया जा सकता है.

महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार का संदेश

आसिया की पहल खास तौर पर उन महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो रोजगार के विकल्प तलाश रहे हैं. वह बेरोजगार युवाओं, विशेष रूप से महिलाओं को स्वरोजगार और छोटे स्तर के उद्यम शुरू करने पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करती हैं.

नवाचार से बनी आत्मनिर्भरता की राह

मशरूम उत्पादन से शुरू हुई आसिया अकबर की पहल अब सब्जियों, मसालों और पौध तैयार करने वाले विविध कृषि उद्यम में बदल चुकी है. उनकी कहानी बताती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक खेती की तकनीकों और उपलब्ध जगह के बेहतर इस्तेमाल से आय का स्थायी जरिया तैयार किया जा सकता है.

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