खरीफ सीजन के लिए आईं प्याज की नई किस्में, किसानों को मिलेगा ज्यादा उत्पादन

खरीफ सीजन के लिए आईं प्याज की नई किस्में, किसानों को मिलेगा ज्यादा उत्पादन

प्याज किसानों के लिए राहतभरी खबर. DOGR की पांच उन्नत प्याज किस्में भीमा सुपर, भीमा डार्क रेड, भीमा रेड, भीमा श्वेता और भीमा शुभ्रा किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. ये किस्में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और भंडारण क्षमता के लिए जानी जाती हैं.

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खरीफ सीजन के लिए आईं प्याज की नई किस्में, किसानों को मिलेगा ज्यादा उत्पादनप्याज की नई किस्मों से किसानों की बढ़ेगी आमदनी

प्याज की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. पश्चिम बंगाल के कल्याणी स्थित विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय (BCKV) में आयोजित ‘ऑल इंडिया नेटवर्क रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन अनियन एंड गार्लिक’ (AINRPOG) की कार्यशाला में डायरेक्टोरेट ऑफ अनियन एंड गार्लिक रिसर्च (DOGR) द्वारा विकसित प्याज की पांच उन्नत किस्मों से किसान अधिक से अधिक उत्पादन ले सकते हैं और बेहतर कमाई कर सकते हैं.

इन किस्मों में भीमा सुपर, भीमा डार्क रेड, भीमा रेड, भीमा श्वेता और भीमा शुभ्रा शामिल हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ये किस्में अधिक उत्पादन, बेहतर क्वालिटी और भंडारण क्षमता के कारण किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती हैं.

भीमा सुपर

यह लाल रंग की एक उन्नत किस्म है, जिसे कई राज्यों में खरीफ और देर से खरीफ मौसम के लिए सुझाया गया है. इसकी औसत पैदावार खरीफ में 20 से 22 टन प्रति हेक्टेयर और देर से खरीफ में 40 से 45 टन प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है. DOGR की लाल प्याज की एक किस्म को छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु में खरीफ के मौसम के लिए जारी करने के लिए चुना गया है.

भीमा डार्क रेड

यह किस्म अपने आकर्षक गहरे लाल रंग और चपटे गोल कंदों के लिए जानी जाती है. यह 95 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी औसत बिक्री योग्य पैदावार 20 से 22 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है. DOGR की इस प्याज की किस्म को खरीफ के मौसम के लिए छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु में जारी करने के लिए चुना गया है.

भीमा रेड

इस किस्म को अब खरीफ मौसम के लिए भी कई राज्यों में जारी करने की सिफारिश की गई है. इसकी पैदावार खरीफ में 19 से 21 टन, देर से खरीफ में 48 से 52 टन और रबी में 30 से 32 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है. रबी मौसम में इसे तीन महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है. महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रबी के मौसम के लिए पहले से ही सुझाई गई यह किस्म, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु में खरीफ के मौसम के लिए भी जारी करने की सिफारिश की गई है.

भीमा श्वेता

सफेद प्याज की भीमा श्वेता किस्म को भी खरीफ मौसम के लिए उपयुक्त माना गया है. यह 110 से 120 दिनों में तैयार होती है और खरीफ में 18 से 20 टन और रबी में 26 से 30 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है. इसकी भंडारण क्षमता भी अच्छी है. सफेद प्याज की यह किस्म, जिसे पहले ही रबी के लिए सुझाया जा चुका है, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तमिलनाडु में खरीफ के लिए भी जारी करने की सिफारिश की गई है.

भीमा शुभ्रा

वहीं भीमा शुभ्रा किस्म को खरीफ और कुछ क्षेत्रों में देर से खरीफ मौसम के लिए सुझाया गया है. यह बदलते मौसम को सहन करने में सक्षम है और देर से खरीफ में 36 से 42 टन प्रति हेक्टेयर तक पैदावार दे सकती है. सफेद प्याज की इस किस्म को छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तमिलनाडु में खरीफ के मौसम के लिए सुझाया गया है.

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन नई किस्मों के जारी होने से किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर क्वालिटी और बाजार में अच्छा दाम मिलने में मदद मिलेगी.

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