अब AI बताएगा फसल की पैदावार का अनुमान, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया ये नया मॉडल

अब AI बताएगा फसल की पैदावार का अनुमान, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया ये नया मॉडल

खेती को स्मार्ट और आसान बनाने की दिशा में बड़ी पहल हुई है. चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा AI मॉडल तैयार किया है, जो उपग्रह तस्वीरों, मौसम की जानकारी और पुराने कृषि आंकड़ों के आधार पर फसल की पैदावार का अनुमान लगा सकेगा.

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अब AI बताएगा फसल की पैदावार का अनुमान, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया ये नया मॉडलAI बताएगा फसल की पैदावार का अनुमान

कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है. दरअसल, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉडल तैयार किया है, जो किसानों को पहले ही फसल की पैदावार का सटीक अनुमान लगाने में मदद करेगा. यह मॉडल उपग्रह तस्वीरों, मौसम की जानकारी और पुराने कृषि रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर फसल उत्पादन का अनुमान लगाता है. इस नई तकनीक से किसानों, सरकार और कृषि संस्थानों को बेहतर फैसले लेने में मदद मिलेगी. खासतौर पर बदलते मौसम, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती खाद्य मांग के बीच यह मॉडल खेती को ज्यादा स्मार्ट और टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

कैसे काम करेगा AI मॉडल?

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों की टीम ने एक हल्का ट्रांसफॉर्मर मॉडल विकसित किया है. यह मॉडल यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के सेंटिनल-1 और सेंटिनल-2 उपग्रहों से मिलने वाले डेटा का उपयोग करता है. उपग्रहों से खेतों की स्थिति, फसल की बढ़त, मिट्टी की नमी और पौधों के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी मिलती है. इसके साथ ही बारिश, तापमान और पुराने उत्पादन रिकॉर्ड को जोड़कर यह AI मॉडल फसल की संभावित पैदावार का अनुमान लगाता है.

पारंपरिक तरीकों से ज्यादा सटीक

फसल उत्पादन का अनुमान लगाने के लिए पहले खेतों का सर्वे किया जाता था, जिसमें ज्यादा समय और मेहनत लगती थी. लेकिन अब AI आधारित यह तकनीक बड़े क्षेत्र में कम समय में ज्यादा सटीक जानकारी दे सकती है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मॉडल ने धान, मक्का, मूंग और गन्ने जैसी प्रमुख फसलों के उत्पादन अनुमान में बेहतर प्रदर्शन किया है. पंजाब के लुधियाना जिले में 2019 से 2023 तक के आंकड़ों के आधार पर इसका परीक्षण किया गया, जिसमें यह रैंडम फॉरेस्ट और LSTM जैसे पुराने मॉडल से बेहतर साबित हुआ.

किसानों को मिलेंगे कई फायदे

इस तकनीक से किसानों को फसल की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी. अगर पहले से उत्पादन का अनुमान मिल जाए तो किसान बीज, खाद, सिंचाई और अन्य संसाधनों का सही इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं, सरकार को भी फसल बीमा, बाजार प्रबंधन और कृषि योजनाओं की बेहतर तैयारी में सहायता मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने और खेती में जोखिम कम करने में मददगार साबित हो सकती है.

कम खर्च में जल्दी परिणाम

वैज्ञानिकों ने बताया कि इस AI मॉडल को इस तरह तैयार किया गया है कि इसे चलाने के लिए कम कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत पड़े. यह पारंपरिक ट्रांसफॉर्मर मॉडल की तुलना में करीब 40 प्रतिशत कम पैरामीटर का इस्तेमाल करता है, जिससे यह बड़े स्तर पर कृषि निगरानी के लिए उपयोगी बनता है. चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की शोध टीम अब इस तकनीक को क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है, ताकि किसानों और कृषि संस्थानों को लगभग वास्तविक समय में फसल से जुड़ी जानकारी मिल सके. कृषि में AI और उपग्रह तकनीक का यह मेल आने वाले समय में खेती को ज्यादा आधुनिक, सटीक और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है. (ANI)

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