गांव की महिलाओं का कमालराजस्थान के जोधपुर की महिलाओं ने बाजरे को सिर्फ अनाज नहीं, बल्कि कमाई का जरिया बना दिया है. नेवरा रोड की ‘गंगा राजीविका स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी महिलाओं ने प्रशिक्षण और तकनीकी मदद लेकर बाजरे से कई तरह के स्वादिष्ट और पौष्टिक प्रोडक्ट्स तैयार किए. धीरे-धीरे इन उत्पादों ने बाजार में पहचान बनाई और महिलाओं ने इसे छोटे कारोबार का रूप दे दिया. आज इस समूह की बेकरी का सालाना टर्नओवर करीब 8 से 10 लाख रुपये तक पहुंच गया है. यह कहानी दिखाती है कि अगर सही प्रशिक्षण, तकनीक और बाजार का साथ मिले, तो बाजरे जैसी पारंपरिक फसल किसानों और ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और अच्छी कमाई का मजबूत जरिया बन सकती है.
इस सफलता की शुरुआत साल 2021 में हुई, जब 10 महिलाओं ने मिलकर गंगा राजीविका स्वयं सहायता समूह बनाया. शुरुआत में महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि खेती और घरेलू काम के साथ अपनी आमदनी कैसे बढ़ाई जाए. इसके लिए उन्हें काजरी (केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान), जोधपुर से प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिला. प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को बाजरे के प्रसंस्करण, उससे अलग-अलग खाद्य उत्पाद बनाने और उन्हें बाजार के लिए तैयार करने की जानकारी दी गई. धीरे-धीरे महिलाओं ने पारंपरिक बाजरे को आधुनिक तरीके से इस्तेमाल करना शुरू किया.
समूह की महिलाओं ने बाजरे से सिर्फ सामान्य खाने वाली चीजें ही नहीं बनाईं, बल्कि उससे कई तरह के ज्यादा कीमत वाले उत्पाद तैयार किए. इनमें बाजरा लड्डू, बाजरा कचरी, बाजरा नमकीन और बाजरा खाखरा जैसे उत्पाद शामिल हैं. इन उत्पादों की खासियत यह है कि इनमें बाजरे जैसे पौष्टिक अनाज का इस्तेमाल किया जाता है और इन्हें आधुनिक पैकेजिंग और बाजार की जरूरत के हिसाब से तैयार किया जाता है. इससे महिलाओं को बाजरे की खेती और स्थानीय उपलब्धता को अतिरिक्त आय में बदलने का मौका मिला.
समूह की सफलता में प्रशिक्षण की बड़ी भूमिका रही. महिलाओं ने कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी तकनीकों को सीखा और फिर अपने स्तर पर प्रोडक्ट बनाना शुरू किया. इसके बाद समूह ने 26 कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों में हिस्सा लिया, जहां उनके प्रोडक्ट्स को लोगों तक पहुंचने का मौका मिल. प्रदर्शनियों और कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को अपने प्रोडक्ट्स की पहचान बनाने के साथ-साथ ग्राहकों की पसंद समझने में भी मदद मिली. इससे कारोबार को धीरे-धीरे विस्तार मिला और समूह की बेकरी इकाई का सालाना टर्नओवर करीब 8-10 लाख रुपये तक पहुंच गया.
गंगा राजीविका स्वयं सहायता समूह की उपलब्धि केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही. बल्कि साल 2023 में G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान समूह की सदस्य कमला चौधरी ने 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों के सामने भारतीय बाजरा आधारित महिला उद्यमिता का प्रतिनिधित्व किया. यह समूह के लिए बड़ी उपलब्धि थी. इससे राजस्थान की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे बाजरा प्रोडक्ट्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली.
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