
पशुपालन करने वाले पशुओं की लगभग सभी जरूरतें पूरी कर लेते हैं, लेकिन उनके सामने हरे चारे की समस्या हमेशा बनी रहती है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसी फसल की जानकारी देंगे, जिससे महीनों तक चारे का झंझट खत्म हो जाएगा. साथ ही किसान इस फसल की खेती कर चारा बेचकर भी अच्छी कमाई कर सकते हैं. इस चारा फसल का नाम बरसीम है. पशुओं के चारे वाली फसलों में बरसीम एक महत्वपूर्ण फसल है.पशुओं के लिए बरसीम एक पौष्टिक आहार होता है. साथ ही पशुओं को ये चारा खिलाने से उनके दूध में बढ़ोतरी भी होती है. ऐसे में अगर आप भी पशुओं को खिलाने के लिए बरसीम की खेती करना चाहते हैं तो नीचे दी गई जानकारी की सहायता से इसके बीज मंगवा सकते हैं.
पशुपालकों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन पोषक तत्वों से भरपूर और सेहतमंद बरसीम की 'BL-43' किस्म के बीज बेच रहा है. इस चारे की बीज को आप ओएनडीसी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकते हैं. यहां किसानों के लिए कई अन्य प्रकार की फसलों के बीज आसानी से मिल जाएंगे. किसान इसे ऑनलाइन ऑर्डर करके अपने घर पर डिलीवरी करवा सकते हैं.
बी एल-43 बरसीम की एक खास किस्म है. इस किस्म की खेती ठंड के साथ गर्मी के मौसम में भी की जा सकती है. अगेती पैदावार पाने के लिए यह उपयुक्त किस्म है. बुवाई के 40 दिनों बाद इस किस्म की पहली कटाई की जा सकती है. वहीं, इसकी खेती से प्रति एकड़ जमीन से 52 टन तक हरे चारे की उपज होती है.
अगर आप भी अपने पशुओं के लिए बरसीम की खेती करना चाहते हैं और बीज खरीदना चाहते हैं तो 2 किलो का पैकेट फिलहाल 16 फीसदी छूट के साथ 500 रुपये में राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर मिल जाएगा. इसे खरीद कर आप आसानी से अपने पशुओं को संतुलित आहार वाली बरसीम का चारा खिला सकते हैं.
बरसीम की खेती के लिए दोमट या चिकनी दोमट मिट्टी अच्छी रहती है, जिसमें पानी की निकासी अच्छी हो. वहीं, बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह जुताई करके समतल करें और सड़ी हुई गोबर की खाद डालें. फिर बीज को बुवाई से पहले राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें. बीज को छिटककर बोएं, और पहली कटाई 30-35 दिनों बाद कर सकते हैं.बता दें कि इसकी खेती सितंबर-अक्टूबर में की जाती है.
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