
तारामीरा की खेतीतारामीरा के बारे में देश के ज्यादातर लोग बहुत कम जानते हैं. ऐसे में हम आपको बता दें कि तारामीरा सरसों और राई कुल की एक तिलहन फसल है. इसके पौधों की लम्बाई 2 से 3 फीट तक होती है. वहीं, राजस्थान में तारामीरा की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. तारामीरा का उपयोग बढ़ने से इसकी खेती मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. ऐसे में अगर आप भी तारामीरा की खेती करना चाहते है तो सस्ते में इस सरकारी संस्थान से इसका बीज खरीद सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे?
किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर तिलहन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर तारामीरा की खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन तारामीरा की बीज बेच रहा है. इस बीज को आप एनएससी के ऑनलाइन स्टोर से ऑनलाइन ऑर्डर करके अपने घर भी मंगवा सकते हैं.

तारामीरा कई तरह के पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है. इससे सरसों से उच्च क्वालिटी का तेल तैयार किया जाता है. इसके बीजों में करीब 35 फीसदी तक तेल होता है. वहीं, तारामीरा के पत्तों का भी लोग भरपूर उपयोग करते हैं. इस पत्ते को रॉकेट लीफ के नाम से जाना जाता है. ये सबसे पौष्टिक सब्जियों में से एक है. इसके छोटे पत्तों को पिज्जा, सलाद, सैंडविच, पास्ता और बर्गर में कच्चा ही डाला जा सकता है. वहीं, पुराने पत्तों का सूप, स्टू और सब्जियां बनाई जाती हैं.
अगर आप भी तारामीरा की खेती करना चाहते हैं तो इसके 50 ग्राम के पैकेट का बीज फिलहाल 27 फीसदी छूट के साथ मात्र 65 रुपये में राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर मिल जाएगा. इसे खरीद कर आप आसानी से तारामीरा की खेती कर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.
तारामीरा की खेती कम बारिश वाले इलाकों में की जाती है, जिसके लिए हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. इसकी बुवाई मध्य सितंबर से अक्टूबर तक नमी के आधार पर की जाती है. वहीं, खेत की तैयारी के लिए हल्की जुताई करें और जैविक खाद मिलाएं, फिर कतारों में बीज 3-5 सेमी की गहराई पर बोएं. बीज बोने से पहले बीजों को 2 ग्राम मैंकोजेब से उपचारित करें.
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