उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंहउत्तर प्रदेश सरकार के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश औद्यानिक उत्पादन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर है, जो प्रदेश के लिए गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि मसाले भारतीय व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने मसाला क्षेत्र में गुणवत्ता, शुद्धता, मूल्य संवर्धन और निर्यात क्षमता को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया. गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय उत्पादों के माध्यम से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रदेश के मसालों की मजबूत पहचान बनाई जा सकती है.
सिंह ने किसानों से कृषि विविधीकरण अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मसालों की खेती कम क्षेत्रफल में भी अधिक मूल्य उपलब्ध करा सकती है. उन्होंने बताया कि मसाला क्षेत्र में प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर उद्यमियों को अनुदान दिया जा रहा है.
उद्यान मंत्री दिनेश सिंह ने मसाला उद्योग से जुड़े उद्यमियों से किसानों के साथ सीधे जुड़कर उत्पादन कराने की अपील की, ताकि प्रदेश में मसाला उद्योग के लिए कच्चे माल की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जा सके. उन्होंने बताया कि लखनऊ में नवनिर्मित आधुनिक एग्री मॉल में प्रमाणित एवं शुद्ध उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए जैविक उत्पादों और मसालों के विपणन के लिए विशेष स्थान आरक्षित किया जाएगा.
इधर, 3EA ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. विभोर मिश्रा ने कहा कि मसाला क्षेत्र का मूल्यांकन केवल उत्पादन की मात्रा के आधार पर नहीं, बल्कि प्रति किलोग्राम और प्रति हेक्टेयर उत्पन्न आर्थिक मूल्य के आधार पर किया जाना चाहिए. उन्होंने कच्चे मसालों के बजाय प्रसंस्कृत सामग्री, मसाला तेल, ओलियोरेजिन तथा ब्रांडेड उत्पादों की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई.
वहीं, सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में अडानी स्पाइसेस, राकेश मसाला, एमडीएच, गोल्डी स्पाइसेस, CSIR-CIMAP और BBAU सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. विशेषज्ञों ने मसाला निर्यात के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों, खाद्य सुरक्षा तथा ट्रेसेबिलिटी के अनुपालन को आवश्यक बताया. उन्होंने कहा कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया खेत से शुरू होकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स तक निरंतर जारी रहनी चाहिए.
सम्मेलन में उद्यान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, मसाला व्यापारियों, निर्यातकों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा उद्योग विशेषज्ञों ने शामिल हुए. वहीं, कार्यक्रम का आयोजन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (CARD) द्वारा किया गया, जबकि 3EA ग्लोबल नॉलेज पार्टनर के रूप में शामिल हुए.
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