यूपी में बदलते मौसम को लेकर किसानों-पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी, पढ़िए ये खास सुझाव

यूपी में बदलते मौसम को लेकर किसानों-पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी, पढ़िए ये खास सुझाव

UP Farmers News: उन्होंने बताया कि मौसम की अनुकूलता और उचित नमी को देखते हुए किसानों को सरसों/राई की उन्नतशील व शोधित किस्मों जैसे पूसा सरसों-32, पूसा सरसों-34, पूसा डबल जीरो, सुरेखा, गिरिराज, वरुणा तथा नरेंद्र सरसों आदि की बुवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

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यूपी में बदलते मौसम को लेकर किसानों-पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी, पढ़िए ये खास सुझावकिसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सुझाव

उत्तर प्रदेश के मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. परिषद द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखें और फसलों में अनावश्यक यूरिया का प्रयोग बिल्कुल न करें, जिससे फसलों में रोग एवं कीटों के प्रकोप को रोका जा सके.वहीं, अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा स्थापित हाई-टेक नर्सरी की पौध का ही उपयोग करना चाहिए.

फसलों में यूरिया का प्रयोग न करने की सलाह

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के महानिदेशक संजय सिंह ने बताया कि धान की फसल में फाल्स स्मट (मिथ्या कण्डुआ) रोग से बचाव के लिए बाली निकलते समय प्रोपीकोनाजोल अथवा कार्बण्डाजिम के घोल का छिड़काव करने और गन्धी कीट की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड अथवा एजाडीरेक्टिन का छिड़काव करने का सुझाव दिया गया है.

खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना

उन्होंने बताया कि मौसम की अनुकूलता और उचित नमी को देखते हुए किसानों को सरसों/राई की उन्नतशील व शोधित किस्मों जैसे पूसा सरसों-32, पूसा सरसों-34, पूसा डबल जीरो, सुरेखा, गिरिराज, वरुणा तथा नरेंद्र सरसों आदि की बुवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही गन्ने की शीघ्र व मध्यम पकने वाली उच्च शर्करायुक्त प्रजातियों तथा आलू की अगेती किस्मों जैसे कुफरी बहार, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी ज्योति व कुफरी सूर्या आदि की समय से बुवाई करने की सलाह दी गई है.

पशुओं में खुरपका-मुंहपका बीमारी

उधर, मत्स्य पालकों को बताया गया है कि कतला, रोहू, नैन और ग्रास कार्प जैसी प्रजातियों का मत्स्य बीज उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम की हैचरियों पर उपलब्ध है, जिसका संचय इस उपयुक्त समय में किया जा सकता है. पशुपालन एवं स्वास्थ्य प्रबंधन के तहत प्रत्येक जनपद के राजकीय पशु चिकित्सालयों के माध्यम से खुरपका-मुंहपका बीमारी और गोवंशीय पशुओं में एलएसडी (लम्पी स्किन डिजीज) टीकाकरण अभियान निःशुल्क संचालित किया जा रहा है.

किसानों और पशुपालकों के टोल फ्री नंबर जारी

संजय सिंह के मुताबिक, किसानों और पशुपालकों के द्वार पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संचालित मोबाइल वेटनरी यूनिट के लिए टोल फ्री नंबर 1962 तथा पशु समस्या निवारण टोल फ्री नंबर 18001805141 जारी किया गया है. इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की प्राकृतिक अथवा आकस्मिक आपदा में सहायता के लिए राज्य स्तरीय आपदा कंट्रोल रूम नंबर 1070 और जनपद स्तरीय नंबर 1077 पर संपर्क किया जा सकता है.

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