भारत में खाद्य तेलों के आयात पर सरकार ने दी जानकारीदेश में दलहन-तिलहन का उत्पादन और आयात के बारे में केंद्र सरकार ने संसद में बड़ी जानकारी दी. सरकार ने बताया कि दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने के लिए खास अभियान चलाया जा रहा है, जिसका असर उत्पादन पर दिख रहा है. सरकार के मुताबिक, इन दोनों फसलों का उत्पादन बीते वर्षों की तुलना में बढ़ा है. उत्पादन बढ़ने से विदेशी आयात में गिरावट दर्ज की गई है. कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने एक सवाल के जवाब में बताया कि तिलहन मिशन के तहत, साल 2025-26 में वैल्यू चेन क्लस्टर में मुफ्त बीज वितरण के तहत 13.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया और खरीफ 2026 के दौरान अब तक 4.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है.
हाल ही में जारी की गई किस्मों के प्रजनक बीजों के उत्पादन के लिए 60 सीड हब और 50 खास तरह के बीज भंडारण यूनिट्स को मंजूरी दी गई है. तिलहन का उत्पादन साल 2022-23 में 413.55 लाख टन से बढ़कर 2025-26 में 430.59 लाख टन (तीसरा अग्रिम अनुमान, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग) हो गया है.
चीनी और वनस्पति तेल निदेशालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य तेलों की घरेलू उपलब्धता वर्ष 2022-23 में 124.23 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 126.30 लाख टन हो गई और खाद्य तेलों का आयात साल 2022–23 में 165.00 लाख टन से घटकर वर्ष 2024-25 में 160.72 लाख टन हो गया है.
कृषि राज्यमंत्री ने बताया, दलहन का उत्पादन वर्ष 2023–24 में 242.46 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2025–26 में 274.09 लाख टन (तीसरा अग्रिम अनुमान, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग) हो गया है. दलहन आयात वर्ष 2024–25 में 72.56 लाख टन से घटकर वर्ष 2025–26 में 59.64 लाख टन हो गया है, जो घरेलू उपलब्धता में सुधार को दर्शाता है.
संसद में सरकार ने बताया, घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाने और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकार ने 3 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) शुरू किया. इस मिशन का लक्ष्य तिलहन उत्पादन को 2022-23 के 39 मिलियन टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करना है.
इसी तरह, दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सरकार ने 11 अक्टूबर 2025 को 'दालों में आत्मनिर्भरता मिशन' शुरू किया. इसका उद्देश्य दालों का उत्पादन 242 लाख टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 350 लाख टन करना है.
NMEO-OS को क्लस्टर आधारित मॉडल पर लागू किया जा रहा है. देशभर में 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टर बनाए गए हैं, जिनका संचालन किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों और अन्य संस्थाओं द्वारा किया जाता है. इन क्लस्टरों के माध्यम से किसानों को उच्च क्वालिटी वाले उन्नत बीज मुफ्त में दिए जाते हैं और आधुनिक खेती की तकनीकों की ट्रेनिंग भी दी जाती है.
मिशन के तहत तेल मिलें लगाने और आधुनिकीकरण के लिए भी सहायता दी जा रही है, ताकि तिलहनों से अधिक तेल लिया जा सके. साथ ही, फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (FLD), क्लस्टर फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (CFLD) और ब्लॉक-स्तरीय डेमोंस्ट्रेशन (BLD) के जरिए किसानों को नई किस्मों और बेहतर कृषि तरीकों को अपनाने के लिए बढ़ावा दिया जाता है, जिससे उत्पादन और उत्पादकता बढ़ सके.
इसके अलावा, मिशन के तहत प्रजनक बीजों की खरीद पर 100% सहायता, नए सीड हब और विशेष बीज भंडारण यूनिटें बनाई जा रही है, ताकि किसानों को पर्याप्त मात्रा में प्रमाणित बीज उपलब्ध हो सकें. सरकार प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के माध्यम से किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर तिलहन की खरीद भी सुनिश्चित कर रही है.
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