बिहार के मखाने ने भरी वैश्विक उड़ान, ऑस्ट्रेलिया भेजी गई 18 मीट्रिक टन की पहली खेप

बिहार के मखाने ने भरी वैश्विक उड़ान, ऑस्ट्रेलिया भेजी गई 18 मीट्रिक टन की पहली खेप

बिहार के प्रसिद्ध मखाने ने वैश्विक बाजार में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. पहली बार 18 मीट्रिक टन मखाने की खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है. इससे बिहार के मखाना किसानों को नए निर्यात बाजार मिलने की उम्मीद बढ़ी है.

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बिहार के मखाने ने भरी वैश्विक उड़ान, ऑस्ट्रेलिया भेजी गई 18 मीट्रिक टन की पहली खेपबिहार के मखाने ने भरी वैश्विक उड़ान

बिहार के खेतों से निकलकर वैश्विक पहचान बना चुके मखाने की मांग लगातार बढ़ रही है.  इसी कड़ी में शुक्रवार को राज्य से पहली बार लगभग 18 मीट्रिक टन (7 कंटेनर) मखाने की खेप ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना की गई. पटना के बिहटा से कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. वहीं, इससे पहले दरभंगा से लगभग 7 टन मखाना कनाडा भेजा गया था. बता दें कि मखाना को जीआई टैग मिलने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग तेजी से बढ़ी है. देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 से 90 प्रतिशत है. वहीं, बीते वर्ष करीब 7 हजार मीट्रिक टन से अधिक  मखाने का निर्यात विभिन्न देशों में हुआ था.

मखाना से जुड़े यंत्रों के लिए तैयार होंगे कृषि बैंक

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आने वाले दिनों में मखाना उत्पादन से जुड़े कृषि यंत्र किसानों को उपलब्ध कराने के लिए कृषि बैंक बनाए जाएंगे. इससे किसानों को आधुनिक उपकरण आसानी से मिल सकेंगे और उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. आगे उन्होंने कहा कि पहले बिहार का मखाना हो या अन्य कृषि उत्पाद मुंबई भेजा जाता था. वहां से टैग लगाकर विदेशों में निर्यात किया जाता था. लेकिन इस बार यहीं से टैग लगाकर मखाना भेजा गया है. साथ ही अब सरकार की कोशिश है कि बिहार की मिट्टी में पैदा होने वाले सभी कृषि उत्पादों की पहचान बिहार के नाम से ही बने और यहीं से टैग लगाकर वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए.

विदेशों में लगातार बढ़ रही है मखाने की मांग

बिहार के मखाने की पहचान और पहुंच विदेशों में लगातार मजबूत हो रही है. अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड सहित कई देशों में पहले से मखाने का निर्यात किया जा रहा है. अब पहली बार ऑस्ट्रेलिया को भी बिहार से सीधे मखाने की खेप भेजी गई है. कृषि मंत्री ने कहा कि यह केवल मखाने का निर्यात नहीं, बल्कि बिहार के किसानों की मेहनत, मिथिला की समृद्ध विरासत और राज्य की कृषि क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर है. उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'लोकल टू ग्लोबल', 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी मजबूती देती है.

एपीडा के क्षेत्रीय कार्यालय से निर्यात को मिली रफ्तार

पटना में एपीडा (APEDA) का क्षेत्रीय कार्यालय खुलने के बाद बिहार के कृषि उत्पादों के निर्यात को नई गति मिली है. उद्यमियों और निर्यातकों को अब जरूरी प्रक्रियाओं में काफी सहूलियत मिल रही है. पिछले साल 11 सितंबर को एपीडा के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन पटना में किया गया था. उस दौरान लगभग 7 टन मखाना कनाडा, न्यूजीलैंड और अमेरिका भेजा गया था. वहीं, इस साल एकबार फिर कनाडा के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के लिए 18 मीट्रिक टन मखाने की खेप रवाना की गई है. इस निर्यात में एपीडा के अलावा BIADA, किसान उत्पादक संगठन (FPO), निर्यातकों और बिहार कृषि विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

192 करोड़ के आसपास पहुंचा विदेश में मखाना का कारोबार

बिहार में मखाने की खेती मुख्य रूप से मिथिलांचल और सीमांचल के 11 से अधिक जिलों में लगभग 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है. राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 4.27 लाख टन मखाने का उत्पादन होता है. बीते कुछ वर्षों में बिहार से मखाने के निर्यात में वृद्धि हुई है. साल 2025_26 के दौरान 7264.89 मीट्रिक टन मखाना विदेश भेजा गया था, जो करीब 192.96 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था. यह बिहार के कृषि निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है.

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