आलू के गिरते दाम ने किसानों की बढ़ाई चिंता, 600 की उम्मीद में मिल रहा सिर्फ 150 रुपये का भाव

आलू के गिरते दाम ने किसानों की बढ़ाई चिंता, 600 की उम्मीद में मिल रहा सिर्फ 150 रुपये का भाव

उत्तर प्रदेश के कन्नौज, कानपुर और मैनपुरी समेत प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्रों में किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. बाजार में आलू के बेहद कम दाम मिलने से किसान लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं.

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आलू के गिरते दाम ने किसानों की बढ़ाई चिंता, 600 की उम्मीद में मिल रहा सिर्फ 150 रुपये का भावआलू के गिरते दाम से किसान परेशान

उत्तर प्रदेश के आलू किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. कानपुर, कन्नौज से लेकर मैनपुरी जिले तक लाखों किसान अपनी मेहनत की फसल का उचित दाम न मिलने से आर्थिक संकट में हैं. सवाल यह है कि आखिर अन्नदाता की पुकार सरकार तक कब पहुंचेगी? कभी आलू उत्पादन में देश की शान कहलाने वाला यह इलाका आज किसानों की बेबसी की कहानी बयां कर रहा है. कन्नौज जिले में लगभग 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती हुई. किसानों ने उम्मीद के साथ अपनी फसल को 197 कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा. लेकिन बाजार में कीमतें इतनी गिर गईं कि किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं.

सरकार की ओर से आलू किसानों की फसल को विदेशों में भेजने की बात कही जाती है, जिसके लिए कार्यशाला का भी आयोजन जिला मुख्यालय पर उद्यान विभाग के द्वारा किया गया, जिसमें आलू किसानों को खेती के तरीके, आलू की क्वालिटी और अन्य नियमों से अवगत कराया गया है.

कोल्ड स्टोरेज में इतने मीट्रिक टन आलू मौजूद

कोल्ड स्टोरेज में 21 लाख 82 हजार 282 मीट्रिक टन से अधिक आलू रखा गया था, जिसमें से आज भी लगभग 16 लाख 98 हजार 252 मीट्रिक टन आलू भंडारित है. किसानों का कहना है कि मौजूदा दामों पर आलू निकालना घाटे का सौदा है. ऐसे में वे मजबूर होकर फसल को कोल्ड स्टोरेज में ही छोड़ देंगे. इस संकट का असर केवल किसानों पर ही नहीं, बल्कि कोल्ड स्टोरेज संचालकों पर भी पड़ रहा है. यदि किसान आलू नहीं निकाल पाए, तो भंडारण शुल्क फंसने का खतरा भी बढ़ जाएगा.

यह सिर्फ आलू की फसल का सवाल नहीं, बल्कि लाखों किसान परिवारों की आजीविका का सवाल है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या सरकार किसानों की इस पुकार को सुनेगी, या फिर मेहनत की पूरी फसल घाटे में चली जाएगी.

600 रुपये की लागत, 100 रुपये में बिक रहा आलू

आलू किसान गोरेलाल ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि इस बार आलू की स्थिति बेहद खराब है. उन्होंने बताया कि करीब 500 रुपये प्रति कट्टी की लागत आई, लेकिन बाजार में सफेद आलू सिर्फ 100 से 150 रुपये तक बिक रहा है. उनका कहना है कि अगर आलू का उचित दाम नहीं मिला तो किसानों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा. एक अन्य किसान ब्रजेश कटियार ने बताया कि आलू की खुदाई शुरू होते ही भाव लगातार गिरता चला गया. किसानों ने शुरुआत में 500-600 रुपये के भाव की उम्मीद की थी, लेकिन अब 150 रुपये तक में भी आलू खरीदने वाला नहीं मिल रहा है.

उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज से आलू निकालने के बाद उसे बाजार तक पहुंचाने के लिए भाड़े का खर्च भी किसानों को उठाना पड़ता है. ऐसे में कम कीमत के कारण नुकसान और बढ़ जाता है. किसान ने सरकार से हस्तक्षेप कर उचित मूल्य दिलाने की मांग की है.

आलू की क्वालिटी और निर्यात पर भी सवाल

सरकारी उद्यान विभाग के अधिकारी आशीष कटियार के मुताबिक, जिले के आलू उत्पादकों के सामने इस समय सबसे बड़ी समस्या कम कीमत की है. उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से किसानों को यह जानकारी दी जा रही है कि आलू की प्रोसेसिंग की क्या संभावनाएं हैं और उत्पादन और क्वालिटी में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि किसानों को यह भी समझाया गया है कि यूरोपीय देशों में आलू का निर्यात करने के लिए किन मानकों और क्वालिटी की जरूरत होती है. अगर आलू की क्वालिटी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो तो निर्यात के रास्ते खुल सकते हैं.

अधिकारी के अनुसार, पहले खाड़ी देशों में चिप्स और अन्य उत्पादों के लिए आलू की मांग रहती थी, लेकिन वहां भेजे जाने वाले आलू के कारोबार पर असर पड़ा है. इसके अलावा नेपाल द्वारा सीमा शुल्क बढ़ाए जाने से भी आलू के कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. इन परिस्थितियों का सीधा असर स्थानीय बाजार में आलू की मांग और किसानों को मिलने वाली कीमत पर दिखाई दे रहा है.

कोल्ड स्टोरेज संचालक भी परेशान

कोल्ड स्टोरेज प्रबंधक हरिश्चंद्र मिश्रा के मुताबिक, मौजूदा स्थिति बेहद नाजुक है. किसानों को आलू निकालकर बेचने के लिए लगातार सूचना दी जा रही है, लेकिन कम कीमत होने के कारण किसान भी असमंजस में हैं. उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर के बाद कोल्ड स्टोरेज खाली करना जरूरी होगा. अगर तब तक आलू की बिक्री नहीं हुई तो बड़ी मात्रा में आलू खराब होने का खतरा है. ऐसी स्थिति में आलू को गड्ढे खुदवाकर नष्ट करने तक की नौबत आ सकती है. किसानों और कोल्ड स्टोरेज संचालकों दोनों का कहना है कि अगर समय रहते सरकार ने बाजार में हस्तक्षेप कर उचित कीमत, बेहतर खरीद व्यवस्था और निर्यात के विकल्प नहीं तलाशे, तो इस साल आलू किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. (प्रभम श्रीवास्तव की रिपोर्ट)

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