बाढ़ ने मचाई तबाहीजम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में भारी बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. साज और प्लांघर इलाकों में नदियों और नालों का पानी इतना तेज बहा कि किनारे की खेती की जमीन, धान के खेत, मक्के की फसल और पशुओं के बाड़े तक बह गए. साथ ही कई परिवारों के लिए यह सिर्फ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि उनकी आजीविका पर बड़ा संकट है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, 19 जुलाई को हुई भारी बारिश के बाद रात में नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे काफी नुकसान हुआ है.
भारी बारिश के बाद तेज बहाव ने कई जगह जमीन को काटना शुरू कर दिया. हालात इतने खराब हो गए कि कुछ घरों के नीचे की जमीन तक कट गई. खेतों में खड़ी धान और मक्के की फसल पानी के तेज बहाव में बह गई. एक स्थानीय निवासी ने बताया कि उनके इलाके में करीब 25 से 30 परिवारों की खेती की जमीन नाले में बह गई है. इन परिवारों की आमदनी का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर था. फसल और जमीन दोनों के चले जाने से अब उनके सामने आगे की खेती और परिवार का खर्च चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है.
बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को हुआ है, जिनके खेत नदियों और नालों के आसपास थे. पानी का बहाव बढ़ने के साथ खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी कटकर बह गई. इससे किसानों को इस साल की फसल का नुकसान तो हुआ ही है, आने वाले समय में भी इन जमीनों पर खेती करना मुश्किल हो सकता है. किसानों का कहना है कि उन्होंने धान और मक्का की फसल में बीज, खाद, मजदूरी और दूसरी चीजों पर पैसा खर्च किया था. फसल तैयार होने से पहले ही बाढ़ ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया.
बाढ़ का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहा. कई लोगों के पशुओं के बाड़े और दूसरी संपत्तियां भी पानी के तेज बहाव में बह गईं. खेती के साथ पशुपालन पर निर्भर परिवारों के सामने अब पशुओं को सुरक्षित रखने और उनके लिए चारे की व्यवस्था करने की भी समस्या है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि बड़े स्तर पर हुई तबाही वाले इलाकों पर अधिकारियों का ध्यान ज्यादा है, लेकिन साज और प्लांघर जैसे प्रभावित क्षेत्रों के परिवारों को पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है. एक स्थानीय निवासी ने दावा किया कि नुकसान के बाद उनके क्षेत्र के विधायक ने भी प्रभावित इलाके का दौरा नहीं किया.
राजौरी के मेहरा गांव में भी भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ ने किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. यहां पहले 19 जुलाई की बाढ़ में खेती की जमीन प्रभावित हुई थी. इसके बाद दोबारा आई बाढ़ ने बची हुई जमीन को भी नुकसान पहुंचाया. एक किसान के मुताबिक, अकेले उनके परिवार की करीब 10-12 कनाल जमीन बह गई, जबकि उनके रिश्तेदारों की करीब 50 कनाल जमीन भी बाढ़ की चपेट में आ गई. किसान ने बताया कि इस जमीन से परिवारों को फसल, पशुओं के चारे और अन्य जरूरतों के लिए सहारा मिलता था. किसान के अनुसार, गांव के करीब 30-40 परिवारों को इसी तरह का नुकसान हुआ है. बाढ़ के तेज बहाव के कारण नदी ने अपना रास्ता बदल लिया और पानी खेतों के बीच से बहने लगा, जिससे उपजाऊ जमीन कटकर बह गई.
लगातार बारिश और अचानक आने वाली बाढ़ ने राजौरी के किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. किसानों की मांग है कि प्रशासन नुकसान का जल्द सर्वे कराए और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए. साथ ही नदियों और नालों के किनारे बसे गांवों में बाढ़ से बचाव के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जाए. किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर जमीन ही बह गई तो अगले सीजन में खेती कैसे होगी. ऐसे में तत्काल राहत के साथ-साथ खेती की जमीन को बचाने, क्षतिग्रस्त खेतों को दोबारा तैयार करने और भविष्य में बाढ़ से सुरक्षा के स्थायी इंतजाम करना जरूरी हो गया है. (ANI)
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