बारिश बनी किसानों के लिए मुसीबत (AI- तस्वीर)मार्च 2026 का मौसम किसानों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं रहा. जब खेतों में रबी फसलें पककर तैयार थीं और किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे, तभी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. मौसम में यह अचानक बदलाव मुख्य रूप से वेस्टर्न डिस्टरबेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुआ, जिसने उत्तर भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत तक के कई राज्यों को प्रभावित किया है. पिछले दिनों हुई बारिश ने राजस्थान, यूपी, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तेज हवाओं, बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को गिरा दिया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर इस बारिश से किन फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है.
इस बेमौसम बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है. तेज हवाओं के कारण फसल जमीन पर बिछ गई, जिससे दानों की क्वालिटी खराब होने और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ गया है. सरसों की फसल भी इस मार से नहीं बच सकी है, जहां कटाई के लिए तैयार फसल थी, वहां ओलावृष्टि ने पौधों को तोड़ दिया है. वहीं, कई जगहों पर कटी हुई सरसों भी बारिश में भीग कर खराब हो रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जैसे इलाकों में जीरा और इसबगोल की फसलों को 40 से 80 फीसदी तक नुकसान की खबर है. वहीं, बिहार और आसपास के क्षेत्रों में मक्का और दलहनी फसलों पर भी मौसम की मार पड़ी है. इसके अलावा बिहार में आम और लीची की फसल जो परागण के लिए तैयार था उस पर भी बारिश ने कहर ढाया है.
बागवानी फसलें भी इससे अछूती नहीं रही है. महाराष्ट्र में अंगूर, अनार, टमाटर और प्याज की फसल को भारी नुकसान हुआ है. खासतौर पर आम की फसल को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि बारिश और ओलावृष्टि से आम के बौर झड़ गए हैं, जिससे इस साल उत्पादन कम होने की आशंका है. इस स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कई किसान ऐसे हैं जिन्होंने फसल में काफी निवेश किया था और अब उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है.
कृषि विशेषज्ञों और मौसम विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. किसानों से कहा गया है कि जो फसल पक चुकी है, उसकी कटाई जल्द से जल्द पूरी कर लें. अगर फसल पहले ही कट चुकी है, तो उसे सूखी और सुरक्षित जगह पर रखें या ढक कर बचाएं. खेतों में पानी जमा न होने दें, इसके लिए जल निकासी की व्यवस्था करना बेहद जरूरी है. अधिक नमी से फसलों में फंगस और अन्य बीमारियां लग सकती हैं, इसलिए जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें.
इसके अलावा किसानों को स्थानीय मौसम की जानकारी पर लगातार नजर रखने की भी सलाह दी गई है, ताकि वे समय रहते सही फैसले ले सकें और नुकसान को कम कर सकें. हालांकि, इस बार का मौसम किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां किसानों की मदद के लिए क्या कदम उठाती हैं, ताकि वे इस संकट से उबर सकें.
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