Chilli Area: मिर्च के अच्छे भाव से बढ़ा किसानों का उत्साह, इस खरीफ सीजन रकबा बढ़ने की उम्मीद

Chilli Area: मिर्च के अच्छे भाव से बढ़ा किसानों का उत्साह, इस खरीफ सीजन रकबा बढ़ने की उम्मीद

खरीफ सीजन में इस बार मिर्च की खेती का रकबा बढ़ने की उम्मीद है. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में किसान बेहतर दाम और कम कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक के चलते अधिक बुवाई की तैयारी कर रहे हैं. कारोबारियों का अनुमान है कि मिर्च का रकबा 2024 के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच सकता है.

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Chilli Area: मिर्च के अच्छे भाव से बढ़ा किसानों का उत्साह, इस खरीफ सीजन रकबा बढ़ने की उम्मीदमिर्च की खेती का रकबा बढ़ने की उम्‍मीद

खरीफ सीजन में इस बार देश में मिर्च की खेती का रकबा बढ़ने की उम्मीद है. बाजार में मजबूत कीमतों और पिछले साल की तुलना में कम बचे स्टॉक ने किसानों का रुझान फिर से मिर्च की खेती की ओर बढ़ा दिया है. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसान अधिक क्षेत्र में मिर्च की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं. गुंटूर स्थित चिली एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वेलगापुडी संबाशिवा राव ने कहा कि इस बार अल नीनो का मिर्च की फसल पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं दिख रही है, क्योंकि यह फसल अपेक्षाकृत कम नमी वाली परिस्थितियों में भी उगाई जा सकती है.

पिछले साल कम हुए थे भाव

उन्होंने कहा कि मजबूत कीमतों के चलते दक्षिण भारत के सभी प्रमुख राज्यों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी किसान मिर्च का रकबा बढ़ा सकते हैं. इस साल खेती का क्षेत्रफल 2024 के रिकॉर्ड स्तर के आसपास रहने की उम्मीद है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, राव ने बताया कि पिछले वर्ष रिकॉर्ड उत्पादन के कारण किसानों को मिर्च के अच्छे दाम नहीं मिले थे, जिससे कई इलाकों में रकबा घट गया था. लेकिन इस बार बाजार की स्थिति बदल गई है और बेहतर कीमतों ने किसानों का भरोसा फिर से बढ़ाया है. यही वजह है कि कई क्षेत्रों में मिर्च की खेती का दायरा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.

निर्यात वाली किस्मों के भाव में तेजी

वेलगापुडी संबाशिवा राव के मुताबिक, निर्यात में इस्तेमाल होने वाली तेजा और अरमूर जैसी किस्मों के दाम करीब 30 प्रतिशत बढ़े हैं. वहीं, घरेलू बाजार में अधिक खपत वाली 334 और सुपर-10 किस्मों की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की तेजी आई है. हालांकि, मसाला उद्योग में इस्तेमाल होने वाली डीडी और 341 जैसी पाउडर किस्मों के भाव करीब 20 प्रतिशत कमजोर हैं.

उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान मसालों की बिक्री धीमी रहने से प्रोसेसिंग कंपनियां नई खरीद नहीं कर रही हैं, लेकिन अगस्त से उनकी मांग बढ़ने की संभावना है. राव ने कहा कि इस समय 40 किलो की करीब 1.46 करोड़ बोरियों का कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक बचा है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 2.29 करोड़ बोरियां था. कम स्टॉक के कारण बाजार में कीमतों को लगातार समर्थन मिल रहा है.

'30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है रकबा'

रिपोर्ट के मुताबिक, एग्रीटेक प्लेटफॉर्म बिगहाट के सह-संस्थापक सचिन नंदवाना ने कहा कि उनके प्लेटफॉर्म पर मिर्च के बीजों की बिक्री के आधार पर इस साल खेती का रकबा करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. उन्होंने बताया कि प्रमुख ब्रांडों के मिर्च बीजों की बिक्री में 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है और सबसे अधिक मांग दक्षिण भारत के राज्यों से आ रही है. उन्होंने यह भी कहा कि अनियमित बारिश और मॉनसून में देरी चिंता का विषय जरूर है, लेकिन बारिश शुरू होने के साथ बीजों की मांग और बढ़ सकती है. अगस्त के अंत तक मिर्च की बुवाई जारी रहने की संभावना है.

उत्तर कर्नाटक में भी बढ़ रही खेती

हुबली स्थित स्पाइसएक्स्ट्रा के संस्थापक और कारोबारी बसवराज हम्पाली ने कहा कि उत्तर कर्नाटक में भी इस बार किसान मिर्च की खेती में अधिक रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने बताया कि धारवाड़ क्षेत्र में, जहां अधिक रंग और कम तीखापन वाली मशहूर ब्याडगी मिर्च उगाई जाती है, वहां बारिश करीब 15 दिन देर से पहुंची है. ऐसे हालात में किसान आमतौर पर कपास या मिर्च में से किसी एक फसल का चयन करते हैं, लेकिन इस बार बेहतर कीमतों के कारण अधिक किसान मिर्च की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं.

नई फसल दिसंबर तक आने की संभावना

बसवराज हम्पाली ने बताया कि मजबूत मांग के कारण केडीएल और डब्बी जैसी ब्याडगी किस्मों के भाव 600 से 700 रुपये प्रति किलो के बीच बने हुए हैं. उन्होंने कहा कि पहले नई फसल नवंबर में बाजार में आने की उम्मीद थी, लेकिन बारिश में देरी के कारण अब इसकी आवक दिसंबर तक खिसक सकती है. इससे मौजूदा सीजन में भी मिर्च की कीमतों को समर्थन मिलने की संभावना बनी हुई है.

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