खोपरा के भाव में गिरावट (सांकेतिक फोटो)पिछले साल जुलाई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद नारियल तेल और खोपरा की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है. केरल के बाजार में नारियल तेल का भाव करीब 227 रुपये प्रति किलोग्राम और खोपरा 131 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा है. यह स्तर जुलाई 2025 में दर्ज हुए रिकॉर्ड भावों की तुलना में काफी कम है, जब नारियल तेल 393 रुपये प्रति किलोग्राम और खोपरा 261 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कोचीन ऑयल मर्चेंट्स एसोसिएशन (COMA) के अध्यक्ष तलत महमूद ने कहा कि कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में कच्चे नारियल की बढ़ी हुई आवक है. उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों में कुछ कारोबारी समूह खोपरा का स्टॉक रोककर कृत्रिम कमी का माहौल बनाने और कीमतें बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इस बार उत्पादन अधिक होने से बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी और कीमतों में तेज उछाल की संभावना फिलहाल कम है.
बाजार के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, केरल में नारियल तेल 227 रुपये प्रति किलोग्राम और खोपरा 131 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है. वहीं, तमिलनाडु में नारियल तेल का भाव करीब 191.75 रुपये प्रति किलोग्राम और खोपरा 127 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है. दोनों राज्यों में पिछले साल की तुलना में कीमतों में उल्लेखनीय नरमी देखने को मिल रही है.
उद्योग सलाहकार के.के. देवराज ने बताया कि वर्ष 2025 में कच्चे नारियल की कम आवक के कारण नारियल और नारियल तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं. लेकिन इस वर्ष केरल और तमिलनाडु में गर्मियों के दौरान बंपर उत्पादन होने से बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. उन्होंने कहा कि कच्चे नारियल का भाव, जो पहले 70 से 75 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था, मार्च से मई के बीच भारी आवक के कारण घटकर लगभग 40 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया.
के.के. देवराज ने कहा कि किसानों के लिए पेड़ों पर चढ़ाई, तुड़ाई और छिलाई की मजदूरी लगातार महंगी होती जा रही है, जिससे उनकी लागत बढ़ी है. दूसरी ओर, मिल संचालकों को पर्याप्त खोपरा मिलने से उनकी प्रोसेसिंग यूनिट्स का संचालन बिना किसी रुकावट के जारी है और कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर हुई है.
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कच्चे माल की कीमत घटने के बावजूद खुदरा बाजार में मांग अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ रही है. व्यापारियों और उपभोक्ताओं को अभी भी कीमतों में और गिरावट की उम्मीद है. लगातार घटती खुदरा कीमतों के कारण पहले खरीदे गए महंगे स्टॉक दुकानों में फंसे हुए हैं, जिससे खुदरा विक्रेताओं को नया माल खरीदने से पहले पुराना स्टॉक निकालने में दिक्कत हो रही है.
के.के. देवराज ने कहा कि जब नारियल तेल महंगा हुआ था तब बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने सूरजमुखी, सोयाबीन और मिश्रित खाद्य तेलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया था. अब जबकि नारियल तेल सस्ता हुआ है, तब भी कई उपभोक्ता पुराने विकल्पों पर ही बने हुए हैं, क्योंकि ये तेल अभी भी नारियल तेल की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हैं.
उद्योग सूत्रों के मुताबिक, कच्चे नारियल का मौजूदा भाव लगभग 42 रुपये प्रति किलोग्राम है और तमिलनाडु में बढ़े उत्पादन से बाजार को लगातार आपूर्ति मिल रही है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण मूल्यवर्धित नारियल उत्पादों के निर्यात में अस्थायी सुस्ती आई है. इसका असर यह हुआ है कि अधिक मात्रा में माल घरेलू बाजार में उपलब्ध हो रहा है, जिससे नारियल तेल और खोपरा की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है.
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