Milk Price Hike: डेयरी कंपनियां 2 रुपये ही महंगा क्यों करती है दूध, चारा कम फ्लश सिस्टम है वजह

Milk Price Hike: डेयरी कंपनियां 2 रुपये ही महंगा क्यों करती है दूध, चारा कम फ्लश सिस्टम है वजह

Milk Price Hike दूध के दामों में बढ़ोतरी हो चुकी है. आज से नए रेट लागू कर दिए गए हैं. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो डेयरी किसानों की लागत पर ज्यादा मुनाफा देने के लिए कंपनियां दो रुपये प्रति लीटर तक दूध के दाम बढ़ा देती हैं. चारे की कमी के साथ फ्लश सिस्टम इसके पीछे बड़ी वजह होती है. 

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Milk Price Hike: डेयरी कंपनियां 2 रुपये ही महंगा क्यों करती है दूध, चारा कम फ्लश सिस्टम है वजहPeople pour large quantity of milk into a container. (Photo: Getty)

एक बार फिर गर्मी के मौसम में दूध के दाम बढ़ चुके हैं. 13 मई को अमूल और मदर डेयरी ने एक साथ दूध के दाम बढ़ाने का ऐलान किया है. एक लीटर दूध पर दो रुपये की बढ़ोतरी हुई है. कई बार तो ऐसा भी होता है कि गर्मियों के दौरान डेयरी कंपनियां दो-दो बार दाम बढ़ाती हैं. एक सवाल ये भी उठता है कि डेयरी कंपनियां प्रति लीटर दूध 2 रुपये ही क्यों महंगा करती हैं. दोनों ही डेयरी कंपनी ने दूध के दाम बढ़ने की वजह चारे का महंगा होना बताया है. 
डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो चारा तो दाम बढ़ने के पीछे वजह है ही, लेकिन सबसे बड़ी वजह डेयरी कंपनियों का फ्लश सिस्टम है. इस सिस्टम के चलते ही गर्मियों में दूध की बढ़ती हुई डिमांड को पूरा किया जाता है. इस सिस्टम को इस्तेमाल करने से दूध की लागत बढ़ जाती है. हालांकि दूध उत्पादन के मामले में देश नंबर वन है. लेकिन खासतौर पर गर्मियों के दौरान डिमांड ज्यादा और दूध की कमी होने लगती है. 

बढ़ती कीमत पर क्या बोले IDA प्रेसिडेंट

इंडियन डेयरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. सुधीर सिंह ने किसान तक को बताया कि दूध के दाम बढ़ने के पीछे एक नहीं कई वजह होती हैं. सबसे पहली तो ये कि चारे के दाम बढ़ जाते हैं. जिससे दूध की लागत में बढ़ोतरी हो जाती है. गर्मियों में उत्पादन भी कम हो जाता है. बाजार में दूध और दूध से बने प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ जाती है. गांव-देहात में शादियों का सीजन होता है तो दूध की सप्लाई कम हो जाती है. दूध की इस कमी को दूर करने के लिए डेयरी कंपनियों में फ्लश सिस्टम बनाया जाता है. फ्लश सिस्टम के तहत पहले दूध से बटर और दूध पाउडर बनाया जाता है. 

इसे बड़े फ्रीजर में स्टोर करके रखा जाता है. और जब गर्मियों में दूध की कमी महसूस होती है तो इसी बटर और दूध पाउडर को दोबारा से मिलाकर दूध बना दिया जाता है. इस सब पर करीब 1.70 रुपये प्रति लीटर का खर्च आता है. अब दूध बेचने के दौरान इस खर्च को भी निकालना है और किसानों को भी उनके दूध का सही दाम देना है. इसलिए गर्मियों में दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ जाते हैं. सर्दियों में जब दूध उत्पादन ठीक-ठाक हो रहा होता है तो ऐसे वक्त में कंपनियां इमरजेंसी के लिए फ्लश सिस्टम में बटर और दूध पाउडर बनाकर रखती हैं.  

हीट स्ट्रेस से घट जाता है दूध 

बफैलो एक्सपर्ट और सीआईआरबी में साइंटिस्ट रहे डॉ. सज्जन सिंह का कहना है कि भैंसों को गर्मी ज्यादा लगती है. उनका पसीना भी जल्दी बाहर नहीं निकल पाता है. गाय-भैंस को 25 से 30 डिग्री तापमान की जरूरत होती है. लेकिन जैसे ही तापमान 40 और 45 डिग्री पर पहुंचता है तो पशु हीट स्ट्रेस में आ जाते हैं. इसके चलते दूध उत्पादन घट जाता है.  

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