अमेरिका ने भारतीय झींगा पर लगाई ड्यूटीअमेरिकी टैरिफ के बाद भी सीफूड एक्सपोर्ट बड़ी छलांग लगा रहा है. थोड़े से ही वक्त में दो बार सीफूड एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी हो चुकी है. एक बार फिर सीफूड एक्सपोर्ट से जुड़ी बड़ी खुशखबरी आ रही है. पीआईबी की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक एक बार फिर सीफूड एक्सपोर्ट का आंकड़ा बढ़ गया है. सीफूड एक्सपोर्ट अब 72 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. जबकि काफी दिन से एक्सपोर्ट का आंकड़ा 62 हजार करोड़ रुपये पर ही अटका हुआ था. पीआईबी की ओर से जारी किए गए प्रेसनोट के मुताबिक झींगा के चलते अब ये आंकड़ा बढ़ा है. चीन और यूरोपीय संघ में भारतीय झींगा की डिमांड बढ़ी है.
वहीं भारी-भरकम टैरिफ के बावजूद अमेरिका में भी झींगा एक्सपोर्ट हो रहा है. भारत का मछली पालन क्षेत्र पीएम नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. गौरतलब रहे आजीविका सुरक्षा और राष्ट्रीय विकास में इस क्षेत्र की भूमिका पर जोर देते हुए, पीएम ने कहा है था, "सरकार एक जीवंत मत्स्य पालन क्षेत्र की दिशा में काम करती रहेगी, जिसमें मछली पालकों के जीवन को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा."
MPEDA (एमपीडा) ने हाल ही में सीफूड एक्सपोर्ट से जुड़े कुछ आंकड़े जारी किए हैं. एमपीडा की ओर से जारी शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक साल 2025-26 में भारत का समुद्री भोजन निर्यात (सीफूड एक्सपोर्ट) बढ़कर रिकॉर्ड 72,326 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जबकि डॉलर में (US$ 8.28 बिलियन) पर है. और अगर मात्रा की बात करें तो ये 19.32 लाख मीट्रिक टन पर आ गया है.
इस पूरे आंकड़े में झींगा नंबर वन पर बना हुआ है. सबसे ज्यादा डिमांड फ्रोजन झींगा (जमा हुआ) की डिमांड है. झींगा का एक्सपोर्ट 47,973 करोड़ रुपये और (US$ 5.51 बिलियन) डॉलर पहुंच गया है. मात्रा के हिसाब से झींगा निर्यात की बात करें तो 4.6 फीसद और मूल्य के हिसाब से 6.35 फीसद की बढ़ोतरी हुई है. जिससे भारत के समुद्री उत्पादों के निर्यात बास्केट में इसकी प्रमुखता और मजबूत हुई है.
एमपीडा की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका सबसे बड़े खरीदार के रूप में सबसे ऊपर बना हुआ है. अमेरिका में US$2.32 बिलियन का इंपोर्ट हुआ.हालांकि, अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट में मात्रा के हिसाब से 19.8 फीसद और मूल्य के हिसाब से 14.5 फीसद की गिरावट आई. इस गिरावट को अमेरिकी टैरिफ के साथ जोड़कर देखा जा रहा है. लेकिन अमेरिकी टैरिफ पर चीन और यूरोपीय संघ की डिमांड भारी पड़ रही है.
हाल के कुछ महीनों में चीन और यूरोपीय संघ में झींगा की डिमांड बढ़ गई है. एमपीडा के आंकड़ों पर जाएं तो चीन को होने वाले एक्सपोर्ट में मूल्य के हिसाब से 22.7 फीसद की और मात्रा के हिसाब से 20.1 फीसद की बढ़ोतरी हुई है्. वहीं यूरोपीय संघ ने भी मजबूत बढ़त हासिल की है. यहां निर्यात में मूल्य के हिसाब से 37.9 फीसद और मात्रा के हिसाब से 35.2 फीसद की बढ़ोतरी हुई है.
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