Train Late: छुट्टा पशुओं की वजह से चार साल में लेट हुईं सवा लाख से ज्यादा ट्रेन 

Train Late: छुट्टा पशुओं की वजह से चार साल में लेट हुईं सवा लाख से ज्यादा ट्रेन 

Train Late ट्रेन से पशु के कटने पर रेलवे को कई तरह से नुकसान उठाना पड़ता है. हर साल हजारों ट्रेन लेट होती है सो अलग. इस परेशानी को देखते हुए ही रेलवे ने एक नया प्लान बनाया है. पशु प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हि‍त कर वहां ड्राइवर को लगातार सीटी बजाने के निर्देश दिए गए हैं. पशुपालकों के खि‍लाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है. 

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Train Late: छुट्टा पशुओं की वजह से चार साल में लेट हुईं सवा लाख से ज्यादा ट्रेन 

जब किसी भी रेल ट्रेक पर कोई एक ट्रेन बिना किसी जायज वजह के रुकती है तो उसके पीछे-पीछे दो-तीन और ट्रेन को भी रुकना पड़ता है. और इसका रेलवे ही नहीं ट्रेन में बैठे यात्रियों को भी खामियाजा उठाना पड़ता है. रेलवे से जुड़े जानकारों की मानें तो ट्रैक पर चलते-चलते ज्यादातर ट्रेन छुट्टा पशुओं के चलते रुकती हैं. कई बार रेलवे ट्रैक पर घूमने वाले छुट्टा पशु ट्रेन के नीचे आकर कट जाते हैं. ऐसे में सुरक्षा कारणों ट्रेन को रोककर जांच करनी होती है. आरटीआई में मिली जानकारी के मुताबिक बीते चार साल में छुट्टा पशुओं के ट्रेन से कटने के करीब एक लाख मामले सामने आए हैं. 

जिसके चलते सवा लाख के करीब पैसेंजर और गुड्स ट्रेन लेट हुई हैं. बेशक ट्रेन से पशु के कटने की घटना बेहद ही मामूली दिखाई देती हो, लेकिन अभी तक इस पर कोई चर्चा नहीं होती थी. रेलवे को इस तरह की घटनाओं से हर साल करोड़ों रुपये का घाटा उठाना पड़ता है. लेकिन अब रेलवे इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कई कदम उठा रहा है. 

एक लाख पशु कटे, सवा लाख ट्रेन लेट हुईं 

आरटीआई में रेलवे की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक चार साल में सवा लाख से ज्यादा ट्रेन सिर्फ इसलिए लेट हो गईं क्योंकि पशु कटने के बाद उन्हें कुछ देर के लिए रुकना पड़ा था. रेलवे ने पशु कटने के बाद ट्रेन लेट होने के जो आंकड़े बताए हैं वो कुछ इस तरह से हैं. साल 2019-20 में ट्रेन से पशु कटने की 27 हजार घटनाएं हुईं थी. इन सभी घटनाओं में 37 हजार ट्रेन लेट हुईं थी. 2020-21 में 20 हजार घटना के चलते 23 हजार ट्रेन लेट हुईं. 2021-22 में 29 हजार घटनाएं हुईं तो 36 हजार ट्रेन लेट हुईं. 2022-23 में 26 हजार घटनाओं के चलते 36 हजार ट्रेन लेट हुईं थी. 

एक मिनट में 13 से 20 हजार रुपये का नुकसान 

आरटीआई में मिली एक जानकारी के मुताबिक अगर डीजल से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन एक मिनट रुकती है तो उसे 20401 रुपये का नुकसान होता है. वहीं इलेक्ट्रिक ट्रेन को 20459 रुपये का नुकसान होता है. इसी तरह डीजल से चलने वाली गुड्स ट्रेन को एक मिनट रुकने पर 13334 रुपये और इलेक्ट्रिक ट्रेन को 13392 रुपये का नुकसान होता है. यह वो नुकसान है जो सीधे तौर पर रेलवे को होता है. ट्रेन में बैठे यात्रियों को कितना नुकसान उठाना पड़ता है. कुछ खास ट्रेन के लेट होने पर तो रेलवे यात्रियों को मुआवजा भी देता है. घटना के बाद रेलवे हर यात्री को 100-200 रुपये का भुगतान करता है.

करीब एक हजार एफआईआर हुईं दर्ज

कई बार रेलवे पुलिस रेल लाइन के किनारे पशु चराने वालों पर कार्रवाई भी करती है. ऐसे ही कुछ मामलों में रेलवे ने 2019 में दो अलग-अलग धाराओं में 51 एफआईआर दर्ज कीं, 2020 में 126, 2021 में 333 और 2022 में 428 एफआईआर दर्ज की गईं थी.  

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