
आमतौर पर मछली की साफ-सफाई के दौरान निकलने वाले वेस्ट को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. अगर कहीं ये वेस्ट बड़ी मात्रा में होता है तो इस वेस्ट से वापस मछलियों का फीड तैयार किया जाता है. कहीं-कहीं मीट और अंडे का प्रोडक्शन करने वाले पक्षियों के लिए भी मछलियों के वेस्ट से फीड तैयार किया जाता है. हालांकि ये उतने फायदेमंद नहीं होते हैं. हमारे देश में 195 लाख टन से ज्यादा सीफूड का उत्पादन होता है. इसमे से 50 से 60 लाख टन वेस्ट निकलता है. इसी को दोबारा से कुछ खास जगहों पर इस्तेमाल करने के लिए सीफैट, कोच्चि के साइंटिस्ट ने एक रिसर्च की है. रिसर्च के तहत मछलियों के वेस्ट से मेडिकल प्रोडक्ट बनाए जाएंगे. खासतौर पर हड्डी और दांतों से जुड़े प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे.
सीफैट से जुड़े जानकारों का कहना है कि साइंटिस्ट ने एक पेटेंट तकनीक विकसित की है जो मछली के छिलकों के वेस्ट को नैनोफाइबर-आधारित ग्राफ्ट प्रोडक्ट में बदल देती है. यही हड्डियों और दांतों के ट्रीटमेंट में तेजी लाने में मददगार है. इस रिसर्च पर सीनियर साइंटिस्ट बिनसी पीके कर रही हैं. साथ में कैथोलिकेट कॉलेज के सोबी के चाको, पुष्पगिरि कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज के रनेश बी और पुष्पगिरि मेडिकल कॉलेज के नेबू जॉर्ज थॉमस भी इस रिसर्च पर काम कर रहे हैं.
साइंटिस्ट का कहना है कि खासतौर से फिश स्केल्स हाइड्रोक्सीएपेटाइट के एक प्रमुख स्रोत के रूप में उभर रहे हैं. ये एक ऐसा खनिज है जो मानव हड्डी और दांतों के इनेमल से काफी मिलता-जुलता है. एक उन्नत इलेक्ट्रो-स्पिनिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल करके शोधकर्ता इस सामग्री को बहुत ही ज्यादा पतले नैनोफाइबर में बदल देते हैं जो ऊतक बनाने में आधार का काम करते हैं.
ये नैनोफाइबर हड्डी बनाने वाली मॉलिक्यूल्स के जुड़ाव और विकास को सक्षम करके उपचार में सक्रिय रूप से सहायता करते हैं. ये रोगाणुरोधी और सूजनरोधी भी हैं. इससे संक्रमण का खतरा भी कम होता है. दांत और हड्डियों के ऑपरेशन में रिकवरी के अच्छे रिजल्ट मिलते हैं.
साइंटिस्ट का कहना है कि ये रिसर्च जैव-अर्थव्यवस्था मॉडल की ओर इशारा करती है. जिसके तहत वेस्ट को एक प्रोडक्ट में बदला जाता है. मछली के वेस्ट को आंशिक रूप से भी जैव-चिकित्सा-योग्य प्रोडक्ट में परिवर्तित करने से भी महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं. साथ ही पर्यावरणीय बोझ भी कम हो सकता है.
इससे भी ज्यादा खास बात यह है कि यह तटीय क्षेत्रों में अनुसंधान, उद्यमिता और रोजगार के नए रास्ते खोलता है, जहां मछली प्रोसेसिंग आजीविका का एक प्रमुख साधन बना हुआ है. मछली के कचरे को उन्नत चिकित्सा सामग्री में बदलकर वैज्ञानिक न केवल एक लंबे समय से चली आ रही पर्यावरणीय चुनौती का समाधान कर रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं भी पैदा कर रहे हैं.
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