पशुओं को खिलाएं ये हरा चारापशुपालन का काम अब गांव-देहात से लेकर शहरी क्षेत्र के लोगों का प्रमुख कारोबार बनता जा रहा है. लेकिन पशुपालन में मौसम के अनुसार पशुओं को स्वस्थ रखना और पौष्टिक आहार देना सबसे बड़ी चुनौती होती है. सर्दी के दिनों में पशुओं ऊर्जा, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ जाती है. ठंड के दिनों में आमतौर पर देशी पशुओं को 8-10 किलो आहार की रोजाना जरूरत होती है. इसलिए जरूरी है कि सर्दियों के मौसम में पशुपालक अपने पशुओं को हरे चारे के रूप में नेपियर चारा को खिलाएं. साथ ही आज हम आपको बताने वाले हैं कि नेपियर चारे को कैसे बोएं और इसको खिलाने से पशुओं के दूध उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी होगी. आइए जानते हैं.
गन्ने की तरह दिखने वाली सुपर नेपियर घास मूल रूप से थाईलैंड में उगने वाली घास है. जिसे ‘हाथी घास’ के नाम से भी जाना जाता है. इसके पीछे कारण यह है कि इसका आकार काफी बड़ा होता है. यह घास किसानों और पशु पालकों के लिए आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद है. हरे घास में नेपियर घास पशुओं के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. यह घास न केवल पशुओं में दूध उत्पादन को बढ़ाती है बल्कि इससे पशुओं का स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है.
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वैसे तो नेपियर को लगाने का सबसे अच्छा समय मार्च का महीना होता है. लेकिन इसके साथ ही इसकी बुवाई दिसंबर में भी कर सकते हैं. यह एक सदाबहार चारा है. इसलिए यदि इसके टुकड़े बड़े हों, तो इनकी पत्तियां काट देनी चाहिए. इसके साथ ही इसकी बुवाई हमेशा लाइनों और मेड़ों पर ही करनी चाहिए. नेपियर की बुआई ठीक उसी प्रकार की जाती है, जैसे गन्ने की होती है. साथ ही इसकी खासियत की बात करें तो यह प्रत्येक 50 दोनों में बार-बार कटाई के लिए तैयार हो जाता है, जो कि यह प्रक्रिया कई वर्षों तक चलती रहती है. इससे किसानों को बार-बार नेपियर बोने का झंझट नहीं झेलना पड़ता.
हाथी यानी नेपियर पास को बोने के लिए इसके डंठल को काम में लिया जाता है, जिसे नेपियर स्टिक कहा जाता है. स्टिक को खेत में डेढ़ से दो फिट की दूरी पर रोपा जाता है. वहीं एक बीघा में करीब 4 हजार डंठल की आवश्यकता होती है. इस घास के डंठल को कभी भी बोया जा सकता है. वहीं इसके बीज नहीं होते है.
पशुओं में दूध बढ़ाने के लिए नेपियर घास के अलावा बरसीम घास भी मददगार है. इसे काटकर भूसे में मिलाकर देना फायदेमंद है. 3 किलो भूसे में 1.5 किलो बरसीम घास मिलाकर खिलाना बेहतर रहेगा. बरसीम घास पोषक गुणों से भरपूर होने के साथ ही पचाने में भी आरामदायक होता है. पशुओं को लगातार बरसीम खिलाने से उनका दूध बढ़ जाता है और स्वास्थ भी ठीक रहता है.
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