Antibiotics: बिना बीमारी के भी आप खा रहे हैं एंटी बायोटिक, सेहत के साथ खेल रहे हैं दूध-मीट, अंडा

Antibiotics: बिना बीमारी के भी आप खा रहे हैं एंटी बायोटिक, सेहत के साथ खेल रहे हैं दूध-मीट, अंडा

Antibiotics जब किसी बीमार इंसान से डॉक्टर कहता है कि आधी से ज्यादा एंटी बायोटिक दवाई का आपके ऊपर असर नहीं हो रहा है. मतलब आप इंतनी एंटी बायोटिक दवाई खा चुके हैं कि अब ज्यादातर आप पर बेअसर हो रही हैं, तब सेहत पर खतरा और बढ़ता है. इसे ही एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस एएमआर (AMR) कहा जाता है. और इस सब की वजह वो एनिमल प्रोडक्ट हैं जिनके जरिए एंटी बायोटिक हमारे शरीर में पहुंच रहा है. 

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Antibiotics: बिना बीमारी के भी आप खा रहे हैं एंटी बायोटिक, सेहत के साथ खेल रहे हैं दूध-मीट, अंडा Only high-risk drugs—those with potentially serious side effects or stricter safety requirements—would still need a full licence.

जिस अंडा, मीट और मछली को हम स्वाद और पोषक तत्वों के लिए खा रहे हैं वो आपकी सेहत पर जोखिम बढ़ा रहे हैं. इनके जरिए आप न चाहते हुए भी एंटीबायोटिक खा रहे हैं. इससे शरीर को गंभीर नुकसान हो सकते हैं. सबसे बड़ा खतरा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस यानी दवाओं का असर न होना है, जिससे भविष्य में सामान्य संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है. डेयरी-पोल्ट्री प्रोडक्ट, फिश और मीट के जरिए हर साल दुनियाभर के लोग हजारों टन एंटी बायोटिक इंसानी शरीर में जा रहा है. इस बारे में वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन फॉर एनिमल हैल्थ (WOAH), कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) और फेस (FACE) ने चौंकाने वाले आंकड़े दिए हैं.  

रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में हर साल करीब 90 हजार टन एंटी बायोटिक की खपत होती है. इसमे से अकेले 70 फीसदी का इस्तेमाल पोल्ट्री, डेयरी और फिशरीज में हो रहा है. इन क्षेत्रों में एंटी बायोटिक की खपत के मामले में भारत पांचवें स्थान पर पहुंच गया है. अकेले पांच देशों में ही पशु-पक्षियों को 66 फीसद एंटी बायोटिक खि‍लाया जा रहा है. रिपोर्ट बताती है कि पोल्ट्री और फिशरीज दो ऐसे सेक्टर हैं जहां इसकी सबसे ज्यादा खपत है. भारत में भी इसकी खपत तेजी से बढ़ रही है.

चौंकाने वाले हैं AMR से जुड़े ये फैक्ट

  • डेयरी, पोल्ट्री और फिशरीज में सबसे ज्यादा एंटी बायोटिक का इस्तेमाल चीन में 45 फीसद, ब्राजील 7.9, यूएस 7, थाईलैंड 4.2 और भारत में 2.2 फीसद किया जा रहा है. 
  • 2030 तक एंटी बायोटिक खपत के मामले में भारत 5वें से चौथे स्थान पर आ जाएगा. 
  • WOAH के मुताबिक विश्वस्तर पर साल में 80 से 90 हजार टन एंटी बायोटिक इस्तेमाल हो रहा है. 
  • WHO के मुताबिक विश्वस्तर पर पब्लिक हैल्थ को जो 10 खतरे हैं उसमे एक एएमआर भी है. 
  • 2050 तक एएमआर की वजह से विश्व की जीडीपी 3.8 फीसद कम हो सकती है. 
  • 2050 तक एएमआर की वजह से विश्व में एनिमल प्रोडक्ट प्रोडक्शन 7.5 फीसद घट सकता है. 
  • 2050 तक एएमआर की वजह से विश्व में सालाना एक करोड़ मौत होने की आशंका है. 
  • AMR इश्यू के चलते भारत का एनिमल प्रोडक्ट एक्सपोर्ट नहीं बढ़ पा रहा है. 

क्यों बढ़ रही है एंटी बायोटिक की खपत 

  • दवा मिला चारा (Medicated Feed) बिना जरूरत के एंटी बायोटिक के इस्तेमाल का एक मुख्य जरिया है. 
  • पोल्ट्री और एक्वाकल्चर में एंटी बायोटिक को ग्रोथ बढ़ाने वाले तत्वों के तौर पर या बीमारी से बचाव के लिए मिलाया जाता है. 
  • बड़े पैमाने पर एंटी बायोटिक देना  जब झुंड में कुछ ही जानवर बीमार हों.
  • बीमारी शुरू होने से पहले  जानवरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते समय खि‍लाया जाता है. 
  • टीकाकरण के दौरान और  बदलते मौसम के तनाव से बचाने के लिए खि‍लाया जाता है. 
  • एंटी बायोटिक का बड़े पैमाने पर और अक्सर बिना किसी देखरेख के खासतौर पर इन बीमारियों के इलाज के लिए बहुत किया जाता है.
  • डेयरी पशुओं में थनैला (Mastitis), लंगड़ापन, सांस की बीमारियां.
  • पोल्ट्री में कोक्सीडियोसिस, नेक्रोटिक एंटराइटिस.
  • एक्वाकल्चर में बैक्टीरियल गिल रोग, वाइब्रियोसिस.

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