झींगा तालाब का प्रतीकात्मक फोटो.फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो मछली के मुकाबले झींगा काफी सेंसेटिव होता है. झींगा पर मौसम का बहुत तेजी से असर होता है. गर्मियों में जैसे ही तापमान बढ़ता है तो पानी में आक्सीजन की कमी होने लगती है. झींगा लू की भी चपेट में आ जाता है. कई तरह की बीमारियां लगने लगती हैं. झींगा एक्सपर्ट की मानें तो 32 डिग्री से ज्यादा तापमान झींगा मछली के लिए जानलेवा हो जाता है. जैसे उत्तर भारत के दर्जनों शहरों में तापमान मार्च में ही 32 डिग्री को पार करने लगता है. खासतौर पर यूपी, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में झींगा पालन करने वालों को बढ़ते तापमान का ज्यादा सामना करना पड़ता है.
झींगा को गर्मी और लू से बचाने के लिए किसानों को कई तरह के टिप्स दिए जाते हैं. तालाब के पानी और झींगा को दिए जाने वाले फीड से लेकर रखरखाव के बारे में एडवाइजरी जारी की जाती है. खासतौर से तालाब के पानी का तापमान, पानी का स्तर, तालाब की सफाई आदि पर खास ध्यान देने की सलाह दी जाती है.
झींगा किसान और एक्सपर्ट डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि भारत में ज्यादातर विदेशी झींगा का पालन किया जाता है. इस झींगा को 26 से 31 डिग्री तापमान वाले पानी की जरूरत होती है. लेकिन अभी तेज गर्म हवाएं चलने के साथ ही तापमान भी बढ़ रहा है. यह झींगा के लिए बहुत ही खतरनाक है.
यही वजह है कि पंजाब और राजस्थान में गर्मी और लू के चलते झींगा मर रहा है. तालाब में फाइटो क्लाइंजम (अल्गी) लगी होती है. पानी के अंदर इसी से झींगा को मुख्य रूप से ऑक्सीजन मिलती है. लेकिन तेज गर्मी और गर्म पानी के चलते यह मुरझा जाती है. बिजली बहुत महंगी है तो मछली पालक पंखे और इरेटर बहुत कम चलाते हैं.
डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि मौजूदा मौसम को देखते हुए तालाब के पानी को ठंडा रखने के लिए खासतौर पर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक पंखे और इरेटर चलाएं. गर्मियों में सूखा खाने को न दें. एक लीटर मीठे फ्रेश पानी में 100 ग्राम गुड़ घोलकर, दो से तीन ग्राम विटामिन सी घोलकर दें. ग्लूकोज पाउडर भी खोलकर पिलाया जा सकता है. झींगा को दी जाने वाली दोपहर की खुराक एकदम कम कर दें.
10 फीसद से ज्यादा खाने को न दें. सुबह-शाम और रात 30-30 फीसद तक खाने को दें. तालाब के पानी की हाईट बढ़ा दें. अगर तालाब में 3.5 फुट पानी है तो उसे पांच से 5.5 फुट कर दें. क्योंकि ऊपर का पानी गर्म भी हो जाएगा तो 3.5 फुट पानी की सतह सामान्य बनी रहेगी.
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