एनिमल हसबेंडरी मंत्रालय की रिपोर्ट.आने वाले चार से पांच साल किसान बाजार के हैं. बाजार में डिमांड बढ़ेगी तो निवेश भी आएगा. इतना ही नहीं गांव से लेकर शहर तक नौकरियों के मौके भी मिलेंगे. ये कहना है कि अमूल के पूर्व एमडी और इंडियन डेयरी एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. आरएस सोढ़ी का. डॉ. सोढ़ी की मानें तो जिस बाजार में सामान किसान और पशुपालक से होता हुआ आता है, तो उसे किसान बाजार कहा जाता है. अगर इस बाजार के साइज पर नजर डालें तो आज ये 50 लाख करोड़ से ज्यादा का हो चुका है. और अभी ये लगातार बढ़ रहा है. अगर यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले चार से पांच साल में खाने-पीने का ये बाजार 170 लाख करोड़ का हो जाएगा. अभी किसान बाजार 50 लाख करोड़ में से सिर्फ सात लाख करोड़ का ही ऑर्गेनाइज्ड है.
अगर ये आंकड़ा भी बढ़ जाए तो फिर किसान बाजार की तरक्की आसमान को छूएगी. बावजूद इसके ऐसी उम्मीद की जा रही है कि आने वाले चार से पांच साल इस बाजार के लिए गोल्डन पीरियड के रूप में होंगे. इसी आधार पर कहा जा सकता है कि बाजार में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आएगा. 2030 तक देश के अंदर डेयरी, पोल्ट्री, पशुपालन और फिशरीज में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. नौकरी और रोजागार की भरमार होगी. जिस ग्रामीण क्षेत्र को नौकरी के मामले में पिछड़ा हुआ माना जाता है वहां सबसे ज्यादा नौकरी और रोजगार के मौके युवाओं को मिलेंगे.
आरएस सोढ़ी ने किसान तक को बताया कि देश में खाने-पीने के सामान का जो 50 लाख करोड़ का बाजार है वो 2030 तक 170 लाख करोड़ का हो जाएगा. अभी 50 लाख करोड़ के बाजार में सात लाख करोड़ का बाजार ही ऑर्गेनाइज्ड है. इसमे से भी 3.5 लाख करोड़ का बाजार अकेले डेयरी का ही है. अगर डेयरी की ही बात करें तो ये सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है. 50 साल पहले दूध का उत्पादन 2.40 करोड़ टन था और अब ये आंकड़ा करीब 25 करोड़ टन को छू चुका है. दूध उत्पादन में हर 25 साल में तीन गुना इजाफा होता है.
आज हमारे देश में हर रोजाना 60 करोड़ लीटर से ज्यादा दूध का उत्पादन होता है. इसमे से 12 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन ऑर्गेनाइज्ड तरीके से हो रहा है. यही 12 करोड़ लीटर दूध सात बाद 24 करोड़ लीटर का हो जाएगा. अब अगर इंडस्ट्री के लिहाज से बात करें तो ऑर्गेनाइज्ड तरीके से एक लाख लीटर दूध प्रोसेसिंग में 50 करोड़ रुपये का खर्च आता है. इस आंकड़े के हिसाब से सात साल में अकेले डेयरी सेकटर में एक लाख करोड़ का निवेश आएगा. मतलब 60 हजार करोड़ रुपये प्रोसेसिंग में और 40 हजार करोड़ रुपये का खर्च मशीनों पर आएगा.
डॉ. सोढ़ी ने बताया कि अगर जॉब यानि नौकरी और कारोबार की बात करें तो एक लाख लीटर दूध प्रोसेस होने पर छह हजार लोगों के लिए नौकरी और कारोबार के रास्ते खुलते हैं. इसमे टॉप से लेकर नीचे तक सभी तरह की नौकरी शामिल हैं. इसमे से एक बड़ा हिस्सा यानि पांच हजार जॉब गांवों में होंगी तो एक हजार शहर में.
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