Animal Vaccination: पशुपालन में वैक्सीनेशन चार्ट का पालन करने के ये हैं फायदे, पढ़ें डिटेल Animal Vaccination: पशुपालन में वैक्सीनेशन चार्ट का पालन करने के ये हैं फायदे, पढ़ें डिटेल
Animal Vaccination बहुत सारे और ऐसे देश हैं जो भारत से बफैलो मीट खरीदना चाहते हैं, लेकिन एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) फ्री पशु का मीट चाहिए. जबकि भारत में अभी ये मुमकिन नहीं हो पा रहा है. इसी परेशानी के चलते चिकन भी एक्सपोर्ट नहीं होता है. इसी वजह से अंडे और डेयरी प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट भी बहुत कम है. हालांकि साइंटिस्ट के मुताबिक एएमआर की परेशानी को वैक्सीनेशन चार्ट का पूरी तरह से पालन कर दूर किया जा सकता है.
गर्भवती पशुओं का टीकाकरणनासिर हुसैन - New Delhi,
- Mar 12, 2026,
- Updated Mar 12, 2026, 10:54 AM IST
भारत विश्व में दूध, मीट और अंडा उत्पादन में पहले से लेकर चौथे स्थान पर है. डेयरी प्रोडक्ट और मीट हो या अंडा सभी की इंटरनेशन मार्केट में खूब डिमांड है. लेकिन डिमांड के मुताबिक बाजार में प्रोडक्ट सप्लाई नहीं हो पा रहे हैं. इसकी एक बड़ी वजह पशु-पक्षियों को होने वाली बीमारियां हैं. इन्हीं बीमारियों के चलते चिकन तो एक्सपोर्ट ही नहीं होता है. नाम के लिए सिर्फ नेपाल और भूटान तक ही जाता है. बफैलो मीट भी बहुत सारे देश इसलिए नहीं खरीदते हैं कि भारतीय पशु बीमारी से ग्रासित रहते हैं.
क्योंकि आज कोई भी देश एनिमल प्रोडक्ट खरीदने से पहले ये शर्त रखता है कि उसे जो प्रोडक्ट दिया जा रहा है वो एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) फ्री है कि नहीं. जबकि डेयरी से लेकर पोल्ट्री और फिशरीज तक में एएमआर एक बड़ी परेशानी बन चुका है. जबकि एक्सपर्ट के मुताबिक एएमआर का एक मात्र इलाज ये है कि पशुओं को एंटी बायोटिक दवाई खाने को न दी जाएं. लेकिन ये तभ मुमकिन होगा जब पशु बीमार न हों, और इसके लिए जरूरी है कि पशुपालक वैक्सीनेशन चार्ट के मुताबिक पशुओं का वैक्सीनेशन कराते रहें.
वैक्सीनेशन चार्ट का पालन करने के फायदे
- वैक्सीनेशन होने के बाद पशु बीमारियों के अटैक से बचे रहते हैं.
- वैक्सीनेशन होने के बाद महामारियों का जल्द असर नहीं होता है.
- पशुओं से मनुष्यों में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है.
- बीमारियो के इलाज से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाव होता है.
- एनिमल प्रोडक्ट से इंसानों में होने वाली बीमारी से बचाव होता है.
- किसानों की पशुपालन में कम लागत से मुनाफा बढ़ जाता है.
वैक्सीनेशन कराने में ये बातें रखें याद
- प्रथम टीकाकरण केवल स्वस्थ पशुओं में ही करना चाहिए.
- टीकाकरण से कम से कम दो सप्ताह पहले कृमिनाशक दवाई देनी चाहिये.
- टीकाकरण के समय पशुओं का हेल्दी होना जरूरी है.
- बीमार और कमजोर पशुओं का टीकाकरण नहीं करना चाहिए.
- बीमारी फैलने से करीब 20-30 दिन पहले टीकाकरण करा लेना चाहिए.
- रोग फैलने के संभावित समय से करीब 20-30 दिन पहले करना चाहिए.
- मानकों के अनुसार कोल्ड बॉक्स में रखे टीके ही पशुओं को लगाने चाहिए.
- जहां पशु ज्यादा हों वहां झुण्ड में पशुओं का टीकाकरण करना जरूरी होता है.
- गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण नहीं करना चाहिए.
- टीकाकरण का रिकार्ड रखने के लिये हमेशा पशु स्वास्थ्य कार्ड बनाएं.
- टीकाकरण के दौरान हर पशु के लिये अलग-अलग सूईयों का इस्तेमाल करें.
- टीके में इस्तेमाल की गई सूई और सिरिज को नियमानुसार डिस्पोज करें.
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