पंजाब के खाने पानी और मिट्टी में झींगा पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है. भारत से एक्सपोर्ट होने वाले सीफूड में सबसे बड़ा आंकड़ा झींगा का होता है. जानकारों के मुताबिक करीब 60 हजार करोड़ रुपये का झींगा एक्सपोर्ट होता है. चीन और अमेरिका झींगा के दो बड़े खरीदार देश हैं. लेकिन ध्यान रहे की देश में झींगा का उत्पादन एक खास तरह की मिट्टी और पानी में होता है. झींगा एक्सपर्ट की मानें तो खारी मिट्टी और खारे पानी में ही झींगा का उत्पादन मुमकिन है. लेकिन मिट्टी और पानी में खारापन एक तय मानक के मुताबिक ही होना चाहिए. और भी दूसरे तत्व मिट्टी और पानी में चाहिए होते हैं.
यही वजह है कि झींगा के लिए तालाब खुदवाने से पहले एक्सपर्ट मिट्टी-पानी की जांच कराने की सलाह देते हैं. इसी को देखते हुए चूरू, राजस्थान में पहली हाईटेक लेब खोली गई है. राजस्थान के अलावा पंजाब, हरियाणा और यूपी में झींगा उत्पादन की बहुत संभावनाएं हैं, इसलिए नॉर्थ इंडिया में ये पहली लैब खोली गई है.
मत्स्य विभाग, राजस्थान के अधिकारी लायक अली का कहना है कि चूरू में झींगा पालन को और बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मिट्टी-पानी की जांच के लिए लैब बनवाई है. वहीं दूसरी ओर केन्द्र सरकार ने पीएम मत्स्य पालन योजना के तहत मछलियों की जांच के लिए भी एक हाईटेक लैब बनवाई है. इस लैब को जलीय कृषि प्रयोगशाला नाम दिया गया है. इतना ही नहीं राजस्थान सरकार ने अपना जिला मत्स्य ऑफिस भी चूरू में खोल दिया है. केन्द्र सरकार ने 16 करोड़ तो राज्य सरकार ने 52 करोड़ रुपये का पैकेज झींगा और मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए चूरू को दिया है. चूरू के झींगा पालकों को राज्य सरकार तकनीकी सहायता भी दे रही है.
सूरत, गुजरात निवासी झींगा किसान और एक्सपर्ट डॉक्टर मनोज शर्मा ने बताया कि सबसे पहली बात तो यह कि जमीन का खारा पानी झींगा पालन के लिए अमृत होता है. जमीन के पानी में किसी भी तरह के बैक्टेरिया नहीं होते हैं और यह पूरी तरह से झींगा के लिए प्योर होता है. झींगा को 26 से 32 डिग्री तापमान वाला पानी चाहिए होता है. तालाब के पानी के तापमान और बाहरी तापमान में 5-6 डिग्री का अंतर रहता है. इसके अलावा झींगा के तालाब में कई तरह के उपकरण लगाए जाते हैं जो पानी में मूवमेंट बनाते रहते हैं. इससे पानी अपने सामान्य तापमान पर ही रहता है. जबकि ठहरा हुआ पानी जल्दी गर्म और ठंडा होता है.
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