महाराष्ट्र के बीड जिले में सूखे से खरीफ की 75% फसलें तबाह हो गई हैं. 8.5 लाख से अधिक मवेशियों के लिए केवल 2 महीने का चारा बचा है. पढ़ें जिला प्रशासन का एक्शन प्लान.
मराठवाड़ा में गंभीर सूखे से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. फसलें बर्बाद होने और चारा-पानी के संकट के कारण छत्रपति संभाजीनगर के वडोद बाजार में किसान मजबूरी में अपने मवेशी बेचने पहुंच रहे हैं.
महाराष्ट्र के बीड में चारा और पानी की किल्लत से चरवाहों की परेशानी बढ़ गई है. भेड़-बकरियों के लिए चारा और पीने का पानी नहीं मिलने का दावा करते हुए चरवाहों ने प्रशासन से चारा छावनियां शुरू करने और टैंकरों से पानी उपलब्ध कराने की मांग की है.
राजस्थान के तपते थार रेगिस्तान से सफलता की एक अनोखी कहानी सामने आई है, जहां एक किसान ने अपनी मेहनत और नवाचार से नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया. उन्होंने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर न केवल खारे पानी को मीठा बनाया, बल्कि उस पानी से बंजर जमीन पर औषधीय पौधों का एक हरा-भरा बाग भी तैयार कर दिया.
नितेश राणे ने छत्रपति संभाजीनगर का दौरा करते हुए कहा कि बारिश और बाढ़ से किसानों के साथ-साथ मछुआरों का भी बहुत बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है. राणे ने कहा कि सरकार किसानों की तरह ही मछुआरों को भी भरपूर मदद देगी. तालाबों, पिंजरों और जाल का जो नुकसान हुआ है, उसका पंचनामा लगभग पूरा हो चुका है.
वाशिम जिले के व्यापारियों और किसानों ने बजरंग दल को ठहराया जिम्मेदार. किसानों ने कहा कि माता पिता को संभालना मुश्किल, तो जानवरों को कैसे पालें. जानवर नहीं बिके तो आर्थिक तंगी के चलते आत्महत्या करना पड़ेगा.
खिल्लारी बैल दक्षिण महाराष्ट्र की शान हैं. लेकिन अब यह नस्ल कम होती जा रही है. खिल्लारी नस्ल में भी कई तरह के बैल पाए जाते हैं. इसकी उत्पत्ति मैसूर राज्य के मवेशियों की हल्लीकर नस्ल से हुई है. इसका नाम "खिलार" से आया है, जिसका अर्थ है मवेशियों का झुंड और खिल्लारी का अर्थ है चरवाहा. ज्यादातर खिल्लारी बैल मूल रूप से दक्षिण महाराष्ट्र के सतारा जिले से हैं.
कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण न केवल पशुओं के लिए चारे और पानी की व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि पशुधन के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है. संकर गायों और भैंसों में दूध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. ऐसा देखा गया है कि इसकी वजह से गायों के दूध उत्पादन में 5 से 20 प्रतिशत की कमी आई है. ऐसे में यह मोबाइल ऐप पशुपालकों को सलाह देगा.
किसानों को यह फायदा दिलाने के लिए आंदोलन चलाने वाले किसान नेता अजीत नवले का कहना है कि योजना का फायदा लेने के लिए हर किसान को आवेदन करने की जरूरत नहीं है. जिस दुग्ध संघ में जितना दूध खरीदा जाता रहा है उसमें सरकार उतने का पैसा डाल देगी और वो संघ इसका फायदा किसानों को देंगे. दुग्ध संघ ही अप्लाई करेंगे.
अकोला जिले में उत्पादित चारा, मुर्गी फीड एवं टोटल मिक्स राशन (टीएमआर) को दूसरे जिलों में ले जाने पर रोक लगा दी गई है. ताकि आने वाले समय में जिले में चारे का संकट और बड़ा न हो. ऐसी ही रोक परभणी जिले में भी लागू की गई है. राज्य में सूखे की वजह से बढ़ा है संकट.
वर्तमान में, परभणी जिले में औसत से कम वर्षा के कारण, इस अवधि के दौरान जानवरों के लिए चारे की कमी गंभीर होने की संभावना है. जिले में पिछले वर्ष की बुवाई रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2023 से 3 लाख 65 हजार 174 मीट्रिक टन चारा शेष है. यह लगभग अप्रैल 2024 तक चलेगा. ऐसे में चारे की कम उपलब्धता को देखते हुए भविष्य में चारे की कमी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.
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